Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1296

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- राहूगण आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣡ वृ꣢त्र꣣हा꣡ वृषा꣢꣯ सु꣣तो꣡ व꣢रिवो꣣वि꣡ददा꣢꣯भ्यः । सो꣢मो꣣ वा꣡ज꣢मिवासरत् ॥१२९६॥

सः । वृ꣡त्र꣢हा । वृ꣣त्र । हा꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । सु꣣तः꣢ । व꣣रिवोवि꣢त् । व꣣रिवः । वि꣢त् । अ꣡दा꣢꣯भ्यः । अ । दा꣣भ्यः । सो꣡मः꣢꣯ । वा꣡ज꣢꣯म् । इ꣣व । असरत् ॥१२९६॥

Mantra without Swara
स वृत्रहा वृषा सुतो वरिवोविददाभ्यः । सोमो वाजमिवासरत् ॥

सः । वृत्रहा । वृत्र । हा । वृषा । सुतः । वरिवोवित् । वरिवः । वित् । अदाभ्यः । अ । दाभ्यः । सोमः । वाजम् । इव । असरत् ॥१२९६॥

Samveda - Mantra Number : 1296
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(सः) वह (वृत्रहा) विघ्ननाशक, (वृषा) सुखवर्षी, (वरिवोवित्) ऐश्वर्य प्राप्त करानेवाला, (अदाभ्यः) अपराजेय, (सुतः) उपासना किया गया (सोमः) रस का खजाना परमेश्वर (असरत्) उपासकों को प्राप्त होता है, (वाजम् इव) जैसे कोई वीर युद्ध क्षेत्र को प्राप्त होता है ॥५॥ यहाँ उपमालङ्कार है ॥५॥
Essence
जैसे कोई वीर सेनापति युद्धभूमि में पहुँच कर अपने पक्ष के योद्धाओं को विजय दिलाता है, वैसे ही परमेश्वर उपासकों के पास पहुँचकर उन्हें विजयोपहार देता है ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर परमात्मा का विषय है।