Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1291

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ शु꣣ष्म्य꣡दा꣢भ्यः꣣ सो꣡मः꣢ पुना꣣नो꣡ अ꣢र्षति । दे꣣वावी꣡र꣢घशꣳस꣣हा꣢ ॥१२९१॥

ए꣣षः꣢ । शु꣣ष्मी꣢ । अ꣡दा꣢꣯भ्यः । अ । दा꣣भ्यः । सो꣡मः꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । अ꣣र्षति । दे꣣वावीः꣢ । दे꣣व । अवीः꣢ । अ꣣घशꣳसहा꣢ । अ꣣घशꣳस । हा꣢ ॥१२९१॥

Mantra without Swara
एष शुष्म्यदाभ्यः सोमः पुनानो अर्षति । देवावीरघशꣳसहा ॥

एषः । शुष्मी । अदाभ्यः । अ । दाभ्यः । सोमः । पुनानः । अर्षति । देवावीः । देव । अवीः । अघशꣳसहा । अघशꣳस । हा ॥१२९१॥

Samveda - Mantra Number : 1291
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः) यह (शुष्मी) बलवान् (अदाभ्यः) दबाया या हराया न जा सकनेवाला, (देवावीः) दिव्यगुणों का रक्षक, (अघशंसहा) पापप्रशंसक भावों को नष्ट करनेवाला (सोमः) प्रेरक परमेश्वर (पुनानः) पवित्रता देता हुआ (अर्षति) सक्रिय है ॥६॥
Essence
परमेश्वर से प्रेरणा प्राप्त करके सभी मनुष्य पवित्र हृदयवाले हों ॥६॥ इस खण्ड में परमात्मा का विषय वर्णित होने से इस खण्ड की पूर्व खण्ड के साथ सङ्गति है ॥ दशम अध्याय में पञ्चम खण्ड समाप्त ॥
Subject
आगे पुनः परमात्मा का वर्णन है।