Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1284

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः (प्रथमपादः) नृमेध आङ्गिरसः (शेषास्त्रयः पादाः) Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣡ सूर्य꣢꣯मरोचय꣣त्प꣡व꣢मानो꣣ अ꣢धि꣣ द्य꣡वि꣢ । प꣣वि꣡त्रे꣢ मत्स꣣रो꣡ मदः꣢꣯ ॥१२८४

एषः꣢ । सू꣡र्य꣢꣯म् । अ꣣रोचयत् । प꣡व꣢꣯मानः । अ꣡धि꣢꣯ । द्य꣡वि꣢꣯ । प꣣वि꣡त्रे꣢ । म꣣त्सरः꣢ । म꣡दः꣢꣯ ॥१२८४॥

Mantra without Swara
एष सूर्यमरोचयत्पवमानो अधि द्यवि । पवित्रे मत्सरो मदः ॥१२८४

एषः । सूर्यम् । अरोचयत् । पवमानः । अधि । द्यवि । पवित्रे । मत्सरः । मदः ॥१२८४॥

Samveda - Mantra Number : 1284
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः) इस (पवमानः) क्रियाशील सोम परमात्मा ने (द्यवि अधि) द्युलोक में (सूर्यम्) सूर्य को (अरोचयत्) चमकाया है और (मदः) आनन्दमय यह परमात्मा (पवित्रे) पवित्र अन्तरात्मा में (मत्सरः) आनन्दजनक होता है ॥५॥
Essence
बाहरी जगत् में सूर्य, चाँद, तारावली आदि में और अन्दर के जगत् मन, मस्तिष्क आदि में जो कर्तृत्व और महत्त्व दिखायी देता है, वह सब परमात्मा का ही है ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा का कर्तृत्त्व और महत्त्व वर्णित किया गया है।