Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1261

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः स देवरातः कृत्रिमो वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ दे꣣वो꣢ वि꣣पा꣢ कृ꣣तो꣢ऽति꣣ ह्व꣡रा꣢ꣳसि धावति । प꣡व꣢मानो꣣ अ꣡दा꣢भ्यः ॥१२६१॥

एषः꣢ । दे꣣वः꣢ । वि꣣पा꣢ । कृ꣣तः꣢ । अ꣡ति꣢꣯ । ह्व꣡रा꣢꣯ꣳसि । धा꣣वति । प꣡व꣢꣯मानः । अ꣡दा꣢꣯भ्यः । अ । दा꣣भ्यः ॥१२६१॥

Mantra without Swara
एष देवो विपा कृतोऽति ह्वराꣳसि धावति । पवमानो अदाभ्यः ॥

एषः । देवः । विपा । कृतः । अति । ह्वराꣳसि । धावति । पवमानः । अदाभ्यः । अ । दाभ्यः ॥१२६१॥

Samveda - Mantra Number : 1261
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः) यह (विपा) मेधावी विद्वान् के द्वारा (कृतः) संस्कृत किया हुआ (पवमानः) पुरुषार्थी, अतएव (अदाभ्यः) किसी से पराजित न किया जा सकनेवाला (देवः) तेजस्वी जीवात्मा (ह्वरांसि) कुटिल कर्मों को वा कुटिल शत्रुओं को (अति) दूर करके (धावति) आगे बढ़ता है ॥६॥
Essence
विद्वान् आचार्य के द्वारा जब मनुष्य का आत्मा संस्कृत किया जाता है, तब मनुष्य बलवान् होकर, सभी बाधाओं को पराजित करके समाज में अग्रगण्य हो जाता है ॥६॥
Subject
आगे फिर उसी जीवात्मा का विषय है।