Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1250

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- जेता माधुच्छन्दसः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
पु꣣रां꣢ भि꣣न्दु꣡र्युवा꣢꣯ क꣣वि꣡रमि꣢꣯तौजा अजायत । इ꣢न्द्रो꣣ वि꣡श्व꣢स्य꣣ क꣡र्म꣢णो ध꣣र्त्ता꣢ व꣣ज्री꣡ पु꣢रुष्टु꣣तः꣢ ॥१२५०॥

पु꣣रा꣢म् । भि꣣न्दुः꣢ । यु꣡वा꣢꣯ । क꣣विः꣢ । अ꣡मि꣢꣯तौजाः । अ꣡मि꣢꣯त । ओ꣣जाः । अजायत । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । वि꣡श्व꣢꣯स्य । क꣡र्म꣢꣯णः । ध꣣र्त्ता꣢ । व꣣ज्री꣢ । पु꣣रुष्टुतः꣢ । पु꣣रु । स्तुतः꣢ ॥१२५०॥

Mantra without Swara
पुरां भिन्दुर्युवा कविरमितौजा अजायत । इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्त्ता वज्री पुरुष्टुतः ॥

पुराम् । भिन्दुः । युवा । कविः । अमितौजाः । अमित । ओजाः । अजायत । इन्द्रः । विश्वस्य । कर्मणः । धर्त्ता । वज्री । पुरुष्टुतः । पुरु । स्तुतः ॥१२५०॥

Samveda - Mantra Number : 1250
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रः) यह देहधारी जीवात्मा (पुराम्) शत्रु-नगरियों का (भिन्दुः) भेदन करनेवाला, (युवा) यौवन-सम्पन्न, (कविः) क्रान्तदर्शी, (अमितौजाः) अपरिमित बलवाला, (विश्वस्य) सब (कर्मणः) क्रियाकाण्ड का (धर्ता) धारणकर्त्ता, (वज्री) शस्त्रास्त्रों को हाथ में लेनेवाला और (पुरुष्टुतः) बहु-स्तुत (अजायत) हुआ है ॥१॥
Essence
जीवात्मा में अपूर्व शक्ति निहित है। अपनी शक्ति को पहचानकर वह महान् से महान् कर्मों को कर सकता है ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा की व्याख्या पूर्वार्चिक में ३५९ क्रमाङ्क पर परमेश्वर, राजा, सेनापति और सूर्य के विषय में की जा चुकी है। यहाँ जीवात्मा का विषय कहते हैं।