Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1236

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मान꣣ नि꣡ तो꣢शसे र꣣यि꣡ꣳ सो꣢म श्र꣣वा꣡य्य꣢म् । इ꣡न्दो꣢ समु꣣द्र꣡मा वि꣢꣯श ॥१२३६॥

प꣡व꣢꣯मान । नि । तो꣣शसे । रयि꣢म् । सो꣣म । श्रवा꣡य्य꣢म् । इ꣡न्दो꣢꣯ । स꣣मु꣢द्रम् । स꣣म् । उद्र꣢म् । आ । वि꣣श ॥१२३६॥

Mantra without Swara
पवमान नि तोशसे रयिꣳ सोम श्रवाय्यम् । इन्दो समुद्रमा विश ॥

पवमान । नि । तोशसे । रयिम् । सोम । श्रवाय्यम् । इन्दो । समुद्रम् । सम् । उद्रम् । आ । विश ॥१२३६॥

Samveda - Mantra Number : 1236
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 8;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (पवमान) पवित्रतादायक (सोम) रसागार परमात्मन् ! आप (श्रवाय्यम्) कीर्ति उत्पन्न करनेवाले (रयिम्) आध्यात्मिक तथा भौतिक ऐश्वर्य को (नितोशसे) देते हो। हे (इन्दो) उपासकों को चन्द्रमा के समान आह्लाद देनेवाले परमेश ! आप (समुद्रम्) जीवात्मरूप समुद्र में (आविश) प्रवेश करो ॥२॥
Essence
जैसे चन्द्रमा अपने आकर्षण से समुद्र के जल को ऊपर उठाता है, वैसे परमेश्वर अपने चुम्बकीय आकर्षण से जीवात्मा को उन्नत करता है ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः परमात्मा का विषय है।