Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1183

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पु꣣नानः꣢ क꣣ल꣢शे꣣ष्वा꣡ वस्त्रा꣢꣯ण्यरु꣣षो꣡ हरिः꣢꣯ । प꣢रि꣣ ग꣡व्या꣢न्यव्यत ॥११८३॥

पुनानः꣢ । क꣣ल꣡शे꣢षु । आ । व꣡स्त्रा꣢꣯णि । अ꣣रुषः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । प꣡रि꣢꣯ । ग꣡व्या꣢꣯नि । अ꣣व्यत ॥११८३॥

Mantra without Swara
पुनानः कलशेष्वा वस्त्राण्यरुषो हरिः । परि गव्यान्यव्यत ॥

पुनानः । कलशेषु । आ । वस्त्राणि । अरुषः । हरिः । परि । गव्यानि । अव्यत ॥११८३॥

Samveda - Mantra Number : 1183
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(अरुषः) आरोचमान अर्थात् तेजस्वी (हरिः) जीवात्मा (कलशेषु) देहरूप कलशों में (आ) आकर (पुनानः) मन आदि को पवित्र करता हुआ (गव्यानि) सूर्य के समान उज्ज्वल (वस्त्राणि) गुण-कर्म-स्वभाव रूप वस्त्रों को (परि अव्यत) धारण करता है ॥६॥
Essence
तभी देहधारी का जन्म सफल होता है, जब वह व्यवहार में अत्यन्त उज्ज्वल गुण, कर्म और स्वभाव को प्रकट करता है ॥६॥
Subject
अगले मन्त्र में जीवात्मा का विषय वर्णित है।