Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1164

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य꣡ आ꣢र्जी꣣के꣢षु꣣ कृ꣡त्व꣢सु꣣ ये꣡ मध्ये꣢꣯ प꣣꣬स्त्या꣢꣯नाम् । ये꣢ वा꣣ ज꣡ने꣢षु प꣣ञ्च꣡सु꣢ ॥११६४॥

ये । आ꣣जीर्के꣡षु꣢ । कृ꣡त्व꣢꣯सु । ये । म꣡ध्ये꣢꣯ । प꣣꣬स्त्या꣢नाम् । ये । वा꣣ । ज꣡ने꣢꣯षु । प꣣ञ्च꣡सु꣢ ॥११६४॥

Mantra without Swara
य आर्जीकेषु कृत्वसु ये मध्ये पस्त्यानाम् । ये वा जनेषु पञ्चसु ॥

ये । आजीर्केषु । कृत्वसु । ये । मध्ये । पस्त्यानाम् । ये । वा । जनेषु । पञ्चसु ॥११६४॥

Samveda - Mantra Number : 1164
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(ये सोमासः) जो ज्ञान-प्रेरक विद्वान् लोग (परावति) परा विद्या के विषय में और (ये) जो (अर्वावति) अपरा विद्या के विषय में, (ये वा) और जो (अदः) इस (शर्यणावति) शरीर-विद्या के विषय में (सुन्विरे) ज्ञान देते हैं, (ये) जो विद्वान् लोग (पस्त्यानाम्) प्रजाओं के (मध्ये) अन्दर, (ये वा) और जो (पञ्चसु जनेषु) यजमान, ब्रह्मा, अध्वर्यु, होता और उद्गाता इन पाँच जनों में (सुन्विरे) ज्ञान देते हैं, (ते) वे (स्वानाः) पढ़ानेवाले (इन्दवः) ज्ञान-रस से भिगोनेवाले (देवासः) विद्वान् लोग (नः) हमारे लिए (दिवः परि) द्युतिमय परमात्मा के पास से (वृष्टिम्) आनन्दरस की वर्षा को और (सुवीर्यम्) सुवीर्य से युक्त आध्यात्मिक धन को (आ पवन्ताम्) प्रवाहित करें ॥१-३॥
Essence
आप्त विद्वान् लोग भिन्न-भिन्न लोगों को उन-उन से सम्बद्ध विद्याओं में निष्णात करके और ब्रह्मानन्द प्रदान करके सुयोग्य बनाते हैं, इसलिए उनका सबको सत्कार करना चाहिए ॥१-३॥ इस खण्ड में परमात्मा का और विद्वान् गुरुओं के पास से प्राप्त होनेवाले ज्ञान-रस तथा ब्रह्मानन्द-रस का वर्णन होने से इस खण्ड की पूर्व खण्ड के साथ सङ्गति जाननी चाहिए ॥ अष्टम अध्याय में पञ्चम खण्ड समाप्त ॥
Subject
इस सम्पूर्ण सूक्त में एक वाक्य में विद्वानों से प्राप्त कराये जाते हुए ब्रह्मानन्द का वर्णन है।