Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1146

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा या꣢꣯हि चित्रभानो सु꣣ता꣢ इ꣣मे꣢ त्वा꣣य꣡वः꣢ । अ꣡ण्वी꣢भि꣣स्त꣡ना꣢ पू꣣ता꣡सः꣢ ॥११४६॥

इ꣡न्द्र꣢꣯ । आ । या꣣हि । चित्रभानो । चित्र । भानो । सुताः꣢ । इ꣣मे꣢ । त्वा꣣य꣡वः꣢ । अ꣡ण्वी꣢꣯भिः । त꣡ना꣢꣯ । पू꣣ता꣡सः꣢ ॥११४६॥

Mantra without Swara
इन्द्रा याहि चित्रभानो सुता इमे त्वायवः । अण्वीभिस्तना पूतासः ॥

इन्द्र । आ । याहि । चित्रभानो । चित्र । भानो । सुताः । इमे । त्वायवः । अण्वीभिः । तना । पूतासः ॥११४६॥

Samveda - Mantra Number : 1146
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्द्र) ऐश्वर्यशाली परमात्मन् ! हे (चित्रभानो) अद्भुत दीप्तिवाले ! आप (आयाहि) आओ, (इमे)ये (सुताः) हमारे पुत्र (त्वायवः) आपकी कामना कर रहे हैं और (अण्वीभिः) सूक्ष्म धार्मिक वृत्तियों के कारण, (तना) धन से (पूतासः) पवित्र हैं ॥१॥
Essence
हमें और हमारी सन्तानों को परमेश्वर का उपासक और पवित्र लक्ष्मीवाला होना चाहिए। पाप से कमाया गया धन धन नहीं, किन्तु साक्षात् पाप ही होता है ॥१॥
Subject
अगले मन्त्र में इन्द्र नाम से परमेश्वर का आह्वान किया गया है।