Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1139

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣢ र꣣यि꣡मा सु꣢꣯चे꣣तु꣢न꣣मा꣡ सु꣢क्रतो त꣣नू꣢ष्वा । पा꣢न्त꣣मा꣡ पु꣢रु꣣स्पृ꣡ह꣢म् ॥११३९॥

आ । र꣣यि꣢म् । आ । सु꣣चेतु꣡न꣢म् । सु꣣ । चेतु꣡न꣢म् । आ । सु꣣क्रतो । सु । क्रतो । तनू꣡षु꣢ । आ । पा꣡न्त꣢꣯म् । आ । पु꣣रुस्पृ꣡ह꣢म् । पु꣣रु । स्पृ꣡ह꣢꣯म् ॥११३९॥

Mantra without Swara
आ रयिमा सुचेतुनमा सुक्रतो तनूष्वा । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥

आ । रयिम् । आ । सुचेतुनम् । सु । चेतुनम् । आ । सुक्रतो । सु । क्रतो । तनूषु । आ । पान्तम् । आ । पुरुस्पृहम् । पुरु । स्पृहम् ॥११३९॥

Samveda - Mantra Number : 1139
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सुक्रतो) शुभ ज्ञानवाले वा शुभकर्मोंवाले परमात्मन् और आचार्य ! आप (आ) हमारे पास आओ। हम आपसे (रयिम्) धन (आ) पाना चाहते हैं, (सुचेतुनम्) उत्कृष्ट ज्ञान (आ) पाना चाहते हैं। (तनूषु) शरीरों के हित के लिए, हम आपको (आ) पाना चाहते हैं। (पान्तम्) रक्षा करनेवाले तथा (पुरुस्पृहम्) बहुत स्पृहणीय आपको (आ) पाना चाहते हैं ॥१२॥
Essence
परमात्मा और आचार्य का सेवन करके सबको धन, ज्ञान, जागरूकता, स्वास्थ्य आदि की सम्पत्ति प्राप्त करनी चाहिए ॥१२॥ इस खण्ड में विद्वान् आचार्य, परमात्मा और ब्रह्मानन्द का वर्णन होने से इस खण्ड की पूर्व खण्ड के साथ सङ्गति जाननी चाहिए ॥ अष्टम अध्याय में द्वितीय खण्ड समाप्त ॥
Subject
आगे फिर परमात्मा और आचार्य का विषय वर्णित है।