Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1112

1875 Mantra
Devata- विश्वे देवाः Rishi- भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः Chhand- द्विपदा त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ꣣दित्यै꣢꣫रिन्द्रः꣣ स꣡ग꣢णो म꣣रु꣡द्भि꣢र꣣स्म꣡भ्यं꣢ भेष꣣जा꣡ क꣢रत् ॥१११२॥

आ꣣दित्यैः꣢ । आ꣣ । दित्यैः꣢ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । स꣡ग꣢꣯णः । स । ग꣣णः । मरु꣡द्भिः꣢ । अ꣣स्म꣡भ्य꣢म् । भे꣣षजा꣢ । क꣣रत् ॥१११२॥

Mantra without Swara
आदित्यैरिन्द्रः सगणो मरुद्भिरस्मभ्यं भेषजा करत् ॥

आदित्यैः । आ । दित्यैः । इन्द्रः । सगणः । स । गणः । मरुद्भिः । अस्मभ्यम् । भेषजा । करत् ॥१११२॥

Samveda - Mantra Number : 1112
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 7;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रः) जीवात्मा (आदित्यैः) मन-बुद्धिसहित ज्ञानेन्द्रियों और (मरुद्भिः) प्राणों के (सगणः) गण से युक्त होकर, अथवा (इन्द्रः) राजा (आदित्यैः) सूर्यसम प्रकाशक ब्राह्मणों और (मरुद्भिः) योद्धा सैनिकों के (सगणः) गण से युक्त होकर (अस्मभ्यम्) हम मनुष्यों के लिए (भेषजा) औषध (करत्) करे ॥३॥ यहाँ श्लेषालङ्कार है ॥३॥
Essence
मनुष्य के शरीर वा राष्ट्र में जो कुछ भी कष्ट होता है,उसका शरीर में स्थित जीवात्मा, मन, बुद्धि, प्राण आदि वा राष्ट्र में स्थित राज्याधिकारी ब्राह्मण और वीर सैनिक युक्ति से प्रतीकार करें ॥३॥
Subject
आगे फिर उसी विषय में कहा गया है।