Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1097

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शक्तिर्वासिष्ठः Chhand- सतोबृहती Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
य꣡स्य꣢ त꣣ इ꣢न्द्रः꣣ पि꣢बा꣣द्य꣡स्य꣢ म꣣रु꣢तो꣣ य꣡स्य꣢ वार्य꣣म꣢णा꣣ भ꣡गः꣢ । आ꣡ येन꣢꣯ मि꣣त्रा꣡वरु꣢꣯णा꣣ क꣡रा꣢मह꣣ ए꣢न्द्र꣣म꣡व꣢से म꣣हे꣢ ॥१०९७॥

य꣡स्य꣢꣯ । ते꣣ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । पि꣡बा꣢꣯त् । य꣡स्य꣢꣯ । म꣣रु꣡तः꣢ । य꣡स्य꣢꣯ । वा꣣ । अर्यम꣡णा꣢ । भ꣡गः꣢꣯ । आ । ये꣡न꣢꣯ । मि꣣त्रा꣢ । मि꣣ । त्रा꣢ । व꣡रु꣢꣯णा । क꣡रा꣢꣯महे । आ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । अ꣡व꣢꣯से । म꣣हे꣢ ॥१०९७॥

Mantra without Swara
यस्य त इन्द्रः पिबाद्यस्य मरुतो यस्य वार्यमणा भगः । आ येन मित्रावरुणा करामह एन्द्रमवसे महे ॥

यस्य । ते । इन्द्रः । पिबात् । यस्य । मरुतः । यस्य । वा । अर्यमणा । भगः । आ । येन । मित्रा । मि । त्रा । वरुणा । करामहे । आ । इन्द्रम् । अवसे । महे ॥१०९७॥

Samveda - Mantra Number : 1097
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(यस्य ते) जिस जगत्स्रष्टा तुझ जगदीश्वर के उत्पन्न किये रस को (इन्द्रः) सूर्य (पिबात्) पीता है, (यस्य) जिस तेरे उत्पन्न किये रस को (मरुतः) पवन पीते हैं, (यस्य वा) और जिस तेरे उत्पन्न किये रस को (अर्यमणा) शत्रु का नियमन करनेवाले बुद्धितत्त्व के साथ (भगः) मन पीता है, (येन) जिस तुझ सर्वान्तर्यामी और सर्वप्रेरक परमेश्वर की सहायता से, हम (मित्रावरुणा) प्राण-अपान को (आ करामहे) अपने अनुकूल करते हैं और जिस तेरी सहायता से (महे अवसे) महान् रक्षा के लिए (इन्द्रम्) जीवात्मा को (आ करामहे) अनुकूल करते हैं। (सः) वह तू सोम परमेश्वर (सुनुषे) सब भौतिक रसों को वा दिव्य आनन्दरस को अभिषुत करता है। [यहाँ ‘स सुन्वे’ इसका परिवर्तित रूप ‘स सुनुषे’ पूर्वमन्त्र से लाया गया है।] ॥२॥
Essence
परमेश्वर के ही रस और शक्ति से सब शरीरस्थ मन, बुद्धि, प्राण आदि और बाह्य सूर्य, चाँद, तारे, बादल, पहाड़, समुद्र, धरती-आकाश आदि रसवान् और शक्तिमान् दिखायी देते हैं ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः परमेश्वर की महिमा वर्णित है।