Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1090

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मान्धाता यौवनाश्वः Chhand- महापङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उ꣣भे꣡ यदि꣢꣯न्द्र꣣ रो꣡द꣢सी आप꣣प्रा꣢थो꣣षा꣡ इ꣢व । म꣣हा꣡न्तं꣢ त्वा म꣣ही꣡ना꣢ꣳ स꣣म्रा꣡जं꣢ चर्षणी꣣ना꣢म् । दे꣣वी꣡ जनि꣢꣯त्र्यजीजनद्भ꣣द्रा꣡ जनि꣢꣯त्र्यजीजनत् ॥१०९०॥

उ꣣भे꣡इ꣢ति । यत् । इ꣣न्द्र । रो꣡द꣢꣯सी꣣इ꣡ति꣢ । आ꣣पप्रा꣡थ꣢ । आ꣣ । पप्रा꣡थ꣢ । उ꣣षा꣢ । इ꣣व । महा꣡न्त꣢म् । त्वा꣣ । मही꣡ना꣢म् । स꣣म्रा꣡ज꣢म् । स꣣म् । रा꣡ज꣢꣯म् । च꣣र्षणीना꣢म् । दे꣣वी꣢ । ज꣡नि꣢꣯त्री । अ꣣जीजनत् । भद्रा꣢ । ज꣡नि꣢꣯त्री । अ꣣जीजनत् ॥१०९०॥

Mantra without Swara
उभे यदिन्द्र रोदसी आपप्राथोषा इव । महान्तं त्वा महीनाꣳ सम्राजं चर्षणीनाम् । देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत् ॥

उभेइति । यत् । इन्द्र । रोदसीइति । आपप्राथ । आ । पप्राथ । उषा । इव । महान्तम् । त्वा । महीनाम् । सम्राजम् । सम् । राजम् । चर्षणीनाम् । देवी । जनित्री । अजीजनत् । भद्रा । जनित्री । अजीजनत् ॥१०९०॥

Samveda - Mantra Number : 1090
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्द्र) वीर मानव ! (यत्) जो तूने (उषाः इव) उषा के समान (उभे रोदसी) आकाश-पृथिवी दोनों को (आ पप्राथ) अपने यश से पूर्ण किया हुआ है, ऐसे (महीनां महान्तम्) महानों में महान् (चर्षणीनां सम्राजम्) मनुष्यों के सम्राट् (त्वा) तुझे (देवी जनित्री) दिव्यगुणमयी माता ने (अजीजनत्) जन्म दिया है, (भद्रा जनित्री) श्रेष्ठ माता ने (अजीजनत्) जन्म दिया है ॥१॥ यहाँ उपमालङ्कार और वीररस है ॥१॥
Essence
मनुष्य अपनी महिमा को पहचानकर बड़े-बड़े कार्य कर सकता है ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा की पूर्वार्चिक में ३७९ क्रमाङ्क पर परमात्मा और राजा के विषय में व्याख्या हो चुकी है। यहाँ वीर मानव को उद्बोधन दिया जा रहा है।