Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 102

1875 Mantra
Devata- अदितिः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
उ꣣त꣢꣫ स्या नो꣣ दि꣡वा꣢ म꣣ति꣡रदि꣢꣯तिरू꣣त्या꣡ग꣢मत् । सा꣡ शन्ता꣢꣯ता꣣ म꣡य꣢स्कर꣣द꣢प꣣ स्रि꣣धः꣢ ॥१०२॥

उ꣣त꣢ । स्या । नः꣣ । दि꣡वा꣢꣯ । म꣣तिः꣢ । अ꣡दि꣢꣯तिः । अ । दि꣣तिः । ऊत्या꣢ । आ । ग꣢मत् । सा꣢ । श꣡न्ता꣢꣯ता । शम् । ता꣣ता । म꣡यः꣢꣯ । क꣣रत् । अ꣡प꣢꣯ । स्रि꣡धः꣢꣯ ॥१०२॥

Mantra without Swara
उत स्या नो दिवा मतिरदितिरूत्यागमत् । सा शन्ताता मयस्करदप स्रिधः ॥

उत । स्या । नः । दिवा । मतिः । अदितिः । अ । दितिः । ऊत्या । आ । गमत् । सा । शन्ताता । शम् । ताता । मयः । करत् । अप । स्रिधः ॥१०२॥

Samveda - Mantra Number : 102
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 11;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(उत) और (स्या) वह (मतिः) सब कुछ जाननेवाली (अदितिः) अखण्डनीय जगन्माता (ऊत्या) रक्षा के साथ (नः) हमारे समीप (आ गमत्) आये। (सा) वह (शन्ताता) शान्तिकर्म में (मयः) सुख (करत्) करे, और (स्रिधः) हिंसा-वृत्तियों तथा हिंसकों को (अप) दूर करे ॥६॥
Essence
‘हे शतकर्मन् ! तू ही हमारा पिता है, तू ही हमारी माता है’ (साम ११७), यहाँ परमात्मा को माता कहा गया है। उसके माता होने का ही यहाँ अदिति नाम से वर्णन है। जगन्माता अदिति है क्योंकि वह कभी खण्डित नहीं होती तथा अदीन, अजर, अमर और नित्य रहती है। विलाप, लूटपाट, हाहाकार से पीड़ित इस जगत् में वह कृपा करके शान्तिप्रिय सज्जनों से किये जाते हुए शान्ति के प्रयत्नों को सफल करके सारे भूमण्डल में सुख की वर्षा करे और हिंसकों को भी अपनी शुभ प्रेरणा से धर्मात्मा बना दे ॥६॥
Subject
अगले मन्त्र में अदिति देवता है, इसमें परमेश्वर का जगन्माता के रूप में वर्णन है।