SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 684

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- पादनिचृत् (गायत्री) Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भी꣢꣫ षु णः꣣ स꣡खी꣢नामवि꣣ता꣡ ज꣢रितॄ꣣णा꣢म् । श꣣तं꣡ भ꣢वास्यू꣣त꣡ये꣢ ॥६८४॥

अ꣣भि꣢ । सु । नः꣣ । स꣡खी꣢꣯नाम् । स । खी꣣नाम् । अविता꣢ । ज꣣रितॄणा꣢म् । श꣣त꣢म् । भ꣣वासि । ऊत꣡ये꣢ ॥६८४॥

Mantra without Swara
अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम् । शतं भवास्यूतये ॥

अभि । सु । नः । सखीनाम् । स । खीनाम् । अविता । जरितॄणाम् । शतम् । भवासि । ऊतये ॥६८४॥

Samveda - Mantra Number : 684
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
हे परमेश्वर ! (नः) हमारी आप (अभि) सब प्रकार से (सु अविता) सुरक्षा करते हैं, जब कि हम आप के (सखीनाम्) सखा बन जाते हैं, और आपके (जरितृणाम्) स्तोता बन जाते हैं। आप (शतम्) सैंकड़ों प्रकार से (ऊतये) हमारी रक्षा के लिये (भवासि) सन्नद्ध रहते हैं ।
Footnote
[ माता, पिता, बन्धु, सखा, मित्र, आदि नानारूपों में परमेश्वर हमारी रक्षा करता है ]