SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 451

1871 Mantra
Devata- उषाः Rishi- संवर्त आङ्गिरसः Chhand- द्विपदा विराट् Swara- पञ्चमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣣षा꣢꣫ अप꣣ स्व꣢सु꣣ष्ट꣢मः꣣ सं꣡ व꣢र्त्तयति वर्त꣣नि꣡ꣳ सु꣢जा꣣त꣡ता꣢ ॥४५१

उ꣣षाः꣢ । अ꣡प꣢꣯ । स्व꣡सुः꣢꣯ । त꣡मः꣢꣯ । सम् । व꣣र्त्तयति । वर्त्तनि꣢म् । सु꣣जात꣡ता꣢ । सु꣣ । जात꣣ता꣢ ॥४५१॥१

Mantra without Swara
उषा अप स्वसुष्टमः सं वर्त्तयति वर्तनिꣳ सुजातता ॥४५१

उषाः । अप । स्वसुः । तमः । सम् । वर्त्तयति । वर्त्तनिम् । सुजातता । सु । जातता ॥४५१॥१

Samveda - Mantra Number : 451
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 11;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
जैसे (उषाः) प्रातः काल की उषा, अपनी (स्वसुः) बहिन रात्री के (तमः) अन्धकार को (अप वर्तयति) हटा देती और अपने (वर्तनिम्) मार्ग पर (सम्-वर्तयति) सम्यक् रूप में आगे-आगे बढ़ती जाती है, और इसीलिये इसका (सुजातता) जन्म उत्तम है, धन्य है, वैसे ही जीवन के आध्यात्मिक - हृदयाकाश में प्रकट हुई (उषाः) प्राथमिक आध्यात्मिक ज्योति, अभ्यासी के अन्धकार को हटा देती, और अपने मार्ग पर सम्यक् रूप में आगे-आगे बढ़ती जाती है, ऐसी आध्यात्मिक ज्योति का जन्म उत्तम है, धन्य है ।
Footnote
[ उषाः आध्यात्मिक उषा = उपासक के हृदय में प्रकट हुई परमेश्वरीय ज्योति की प्रथम झलक ]