SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 390

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣡खा꣢य꣣ आ꣡ शि꣢षामहे꣣ ब्र꣡ह्मेन्द्रा꣢꣯य व꣣ज्रि꣡णे꣢ । स्तु꣣ष꣢ ऊ꣣ षु꣢ वो꣣ नृ꣡त꣢माय धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ ॥३९०॥

स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । आ꣢ । शि꣣षामहे । ब्र꣡ह्म꣢꣯ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । व꣣ज्रि꣡णे꣢ । स्तु꣣षे । उ꣣ । सु꣢ । वः꣣ । नृ꣡त꣢꣯माय । धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ ॥३९०॥

Mantra without Swara
सखाय आ शिषामहे ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे । स्तुष ऊ षु वो नृतमाय धृष्णवे ॥

सखायः । स । खायः । आ । शिषामहे । ब्रह्म । इन्द्राय । वज्रिणे । स्तुषे । उ । सु । वः । नृतमाय । धृष्णवे ॥३९०॥

Samveda - Mantra Number : 390
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(सखायः) हे सर्वभूत- मैत्री की भावना वाले उपासको ! (वज्रिणे) न्यायवज्रधारी, (नृतमाय) सब संसार के सर्वोत्तम नेता, (धृष्णवे) ग्रासुरी भावों का पराभव करने वाले (इन्द्राय) परमेश्वर के प्रति, हम सब मिल कर (ब्रह्म) ब्रह्म-प्रतिपादक वेदमन्त्रों का (आ शिषामहे) उच्चारण और गान करते हैं । हे उपासको ! (वः) तुम्हारे कल्याण के लिये मैं (ऊ) भी, तुम्हारा शिक्षा-गुरु, परमेश्वर की (सु स्तुषे) स्तुतियाँ उत्तम प्रकार से करता हूँ ।
Footnote
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