SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 350

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ए꣢तो꣣ न्वि꣢न्द्र꣣ꣳ स्त꣡वा꣢म शु꣣द्ध꣢ꣳ शु꣣द्धे꣢न꣣ सा꣡म्ना꣢ । शु꣣द्धै꣢रु꣣क्थै꣡र्वा꣢वृ꣣ध्वा꣡ꣳस꣢ꣳ शु꣣द्धै꣢रा꣣शी꣡र्वा꣢न्ममत्तु ॥३५०॥

आ꣢ । इ꣣त । उ । नु꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । स्त꣡वा꣢꣯म । शु꣣द्ध꣢म् । शु꣣द्धे꣡न꣢ । सा꣡म्ना꣢꣯ । शु꣣द्धैः꣢ । उ꣣क्थैः꣢ । वा꣣वृध्वाँ꣡स꣢म् । शु꣣द्धैः꣢ । आ꣣शी꣡र्वा꣢न् । आ꣣ । शी꣡र्वा꣢꣯न् । म꣣मत्तु ॥३५०॥

Mantra without Swara
एतो न्विन्द्रꣳ स्तवाम शुद्धꣳ शुद्धेन साम्ना । शुद्धैरुक्थैर्वावृध्वाꣳसꣳ शुद्धैराशीर्वान्ममत्तु ॥

आ । इत । उ । नु । इन्द्रम् । स्तवाम । शुद्धम् । शुद्धेन । साम्ना । शुद्धैः । उक्थैः । वावृध्वाँसम् । शुद्धैः । आशीर्वान् । आ । शीर्वान् । ममत्तु ॥३५०॥

Samveda - Mantra Number : 350
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 12;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
हे उपासको ! (नु) शीघ्र (एत उ) आओ । हम मिल कर (इन्द्रम्) परमेश्वर की (स्तवाम) स्तुति करें । परमेश्वर (शुद्धम्) शुद्ध पवित्र है । (शुद्धेन) स्वर-ताल लय आदि की दृष्टि से विशुद्ध (साम्ना) सामगानों द्वारा हम परमेश्वर की स्तुतियाँ करें। (शुद्धः) शुद्ध (उक्थैः) ऋचाओं के द्वारा हम शुद्ध पवित्र परमेश्वर की स्तुतियां करें । वह परमेश्वर शुद्ध सामगानों और शुद्ध ऋक्-पाठों द्वारा हमारी (वावृध्वांसम्) वृद्धि करता है । वह शुद्ध सामगानों और शुद्ध ऋक्-पाठों द्वारा (ममत्तु) प्रसन्न होता और (आशीर्वान्) आशीर्वाद देने को तैयार हो जाता है ।
Footnote
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