SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 349

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- तिरश्चीराङ्गिरसः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣢ त्वा꣣ गि꣡रो꣢ र꣣थी꣢रि꣣वा꣡स्थुः꣢ सु꣣ते꣡षु꣢ गिर्वणः । अ꣣भि꣢ त्वा꣣ स꣡म꣢नूषत꣣ गा꣡वो꣢ व꣣त्सं꣢꣫ न धे꣣न꣡वः꣢ ॥३४९॥

आ꣢ । त्वा꣣ । गि꣡रः꣢꣯ । र꣣थीः꣢ । इव । अ꣡स्थुः꣢꣯ । सु꣣ते꣡षु꣢ । गि꣣र्वणः । गिः । वनः । अभि꣢ । त्वा꣣ । स꣢म् । अ꣣नूषत । गा꣡वः꣢꣯ । व꣣त्स꣢म् । न । धे꣣न꣡वः꣢ ॥३४९॥

Mantra without Swara
आ त्वा गिरो रथीरिवास्थुः सुतेषु गिर्वणः । अभि त्वा समनूषत गावो वत्सं न धेनवः ॥

आ । त्वा । गिरः । रथीः । इव । अस्थुः । सुतेषु । गिर्वणः । गिः । वनः । अभि । त्वा । सम् । अनूषत । गावः । वत्सम् । न । धेनवः ॥३४९॥

Samveda - Mantra Number : 349
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 12;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(गिर्वणः) हे वेद वाणियों द्वारा सम्यक् भजने योग्य परमेश्वर ! हम में (सुतेषु) भक्तिरस उत्पन्न हुए-हुए हैं । हमारी (गिरः) स्तुति वाणियाँ (त्वा) आप के लिये (आ तस्थुः) उपस्थित हैं, आपकी प्रतीक्षा में हैं, (इव) जैसे कि (रथीः) रथ का स्वामी, रथ तैयार कर, किसी के आगमन की प्रतीक्षा में खड़ा रहता है । हमारी (गावः) स्तुति-वाणियाँ (अभि) प्रत्यक्ष रूप में (त्वा) आपको (समनूषत) सम्यक स्तुतियां कर रही हैं (न) जैसे कि (धेनवः) दूध पिलाने वाली गोएँ अपने (वत्सम्) बछड़ों की ओर हम्भारती हैं ।
Footnote
[ गावः = गौः वाक् (निघं. १। ११) ]