SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 318

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्रं꣣ न꣡रो꣢ ने꣣म꣡धि꣢ता हवन्ते꣣ य꣡त्पार्या꣢꣯ यु꣣न꣡ज꣢ते꣣ धि꣢य꣣स्ताः꣢ । शू꣢रो꣣ नृ꣡षा꣢ता꣣ श्र꣡व꣢सश्च꣣ का꣢म꣣ आ꣡ गोम꣢꣯ति व्र꣣जे꣡ भ꣢जा꣣ त्वं꣡ नः꣢ ॥३१८॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । न꣡रः꣢꣯ । ने꣣म꣡धि꣢ता । ने꣣म꣢ । धि꣣ता । हवन्ते । य꣢त् । पा꣡र्याः꣢ । यु꣣न꣡ज꣢ते । धि꣡यः꣢꣯ । ताः । शू꣡रः꣢꣯ । नृ꣡षा꣢꣯ता । नृ । सा꣣ता । श्र꣡व꣢꣯सः । च । ꣣ का꣡मे꣢꣯ । आ । गो꣡म꣢꣯ति । व्र꣣जे꣢ । भ꣣ज । त्व꣢म् । नः꣣ ॥३१८॥

Mantra without Swara
इन्द्रं नरो नेमधिता हवन्ते यत्पार्या युनजते धियस्ताः । शूरो नृषाता श्रवसश्च काम आ गोमति व्रजे भजा त्वं नः ॥

इन्द्रम् । नरः । नेमधिता । नेम । धिता । हवन्ते । यत् । पार्याः । युनजते । धियः । ताः । शूरः । नृषाता । नृ । साता । श्रवसः । च । कामे । आ । गोमति । व्रजे । भज । त्वम् । नः ॥३१८॥

Samveda - Mantra Number : 318
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 9;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(नेमधिता) अल्पकालिक ध्यान में, जब व्युत्थान और निरोध वृत्तियों में परस्पर संग्राम चल रहा हो, तब, (नरः) उपासक जन, सहायतार्थ, (इन्द्रम्) परमेश्वर का (हवन्ते) आह्वान करते हैं, (यत्) जबकि (पार्याः) पार करने योग्य अर्थात् निरोध करने योग्य (ताः) उन (धियः) व्युत्थान वृत्तियों का (युनजते) उपासक जन योगविधियों द्वारा निरोध करते हैं । जब उपासकों में (श्रवसः) योगज-यश की प्राप्ति के लिये, (कामे) कामना जागरित हो जाए, तब, (नृषाता) उपासक - जनों को शक्ति प्रदान करने में, (शूरः) हे परमेश्वर ! आप अपना पराक्रम दर्शाइये, और (त्वम्) आप (नः) हमें (गोमति व्रजे) स्तोतजनों के संघ का (आ भज) भागी बनाइये ।
Footnote
[ नेमधिता = नेम (अर्धनाम; निरु० ३। ४। २०) + घि (धारणे), अर्थात् धारणा-वृत्ति के काल में । गोमति = गौः (स्तोता, निघं० ३। १६) ]