SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 303

1871 Mantra
Devata- उषाः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣡त्यु꣢ अदर्श्याय꣣त्यू꣢३꣱च्छ꣡न्ती꣢ दुहि꣣ता꣢ दि꣣वः꣢ । अ꣡पो꣢ म꣣ही꣡ वृ꣢णुते꣣ च꣡क्षु꣢षा꣣ त꣢मो꣣ ज्यो꣡ति꣢ष्कृणोति सू꣣न꣡री꣢ ॥३०३॥

प्र꣡ति꣢꣯ । उ꣣ । अदर्शि । आयती꣢ । आ꣣ । यती꣢ । उ꣣च्छ꣡न्ती꣢ । दुहि꣣ता꣢ । दि꣣वः꣢ । अ꣡प꣢꣯ । उ꣣ । मही꣢ । वृ꣣णुते । च꣡क्षु꣢꣯षा । त꣡मः꣢ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । कृ꣣णोति । सून꣡री꣢ । सु꣣ । न꣡री꣢꣯ ॥३०३॥

Mantra without Swara
प्रत्यु अदर्श्यायत्यू३च्छन्ती दुहिता दिवः । अपो मही वृणुते चक्षुषा तमो ज्योतिष्कृणोति सूनरी ॥

प्रति । उ । अदर्शि । आयती । आ । यती । उच्छन्ती । दुहिता । दिवः । अप । उ । मही । वृणुते । चक्षुषा । तमः । ज्योतिः । कृणोति । सूनरी । सु । नरी ॥३०३॥

Samveda - Mantra Number : 303
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 8;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(दिवः) द्युलोक की (दुहिता) पुत्री अर्थात् उषा के समान वर्तमान “ज्योतिमती” आध्यात्मिक चित्तवृत्ति को मैंने (प्रति, उ) प्रत्यक्ष (अदर्शि) दर्शन कर लिया है । यह ज्योतिष्मती - चित्तवृत्ति (आयती) आती हुई (उच्छन्ती) मेरे अज्ञानान्धकार को दूर कर रही है यह मेरे । दिवः, दुहिता) मस्तिष्क से प्रकट हुई है । (मही) ज्योतिष्मती चित्तवृत्ति महाशक्ति है। इसने मुझे, (चक्षुषा) दिव्यचक्षु देकर मेरे (तमः) अज्ञानान्धकार के पर्दे को (प्रप, उ, वृणुते) हटा दिया है । इसने मेरे भीतर (ज्योति) ज्योतिः (कृणोति) पैदा कर दी है, यह (सूनरी) ज्योति प्रियरूपा ऋतरूपा है, ऋतम्भरा प्रज्ञा का पूर्वरूप है ।
Footnote
[ ज्योतिः = “मूर्धज्योतिषि सिद्धदर्शनम्” (योग ३। ३२) ; तथा “ऋतम्भरा प्रज्ञा” (योग १। ४९) ]