SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 297

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
क꣡ ईं꣢ वेद सु꣣ते꣢꣫ सचा꣣ पि꣡ब꣢न्तं꣣ क꣡द्वयो꣢꣯ दधे । अ꣣यं꣡ यः पुरो꣢꣯ विभि꣣न꣡त्त्योज꣢꣯सा मन्दा꣣नः꣢ शि꣣प्र्य꣡न्ध꣢सः ॥२९७॥

कः꣢ । ई꣣म् । वेद । सुते꣢ । स꣡चा꣢꣯ । पि꣡ब꣢꣯न्तम् । कत् । व꣡यः꣢꣯ । द꣣धे । अय꣢म् । यः । पु꣡रः꣢꣯ । वि꣣भिन꣡त्ति꣢ । वि꣣ । भिन꣡त्ति꣢ । ओ꣡ज꣢꣯सा । म꣣न्दानः꣢ । शि꣣प्री꣢ । अ꣡न्ध꣢꣯सः ॥२९७॥

Mantra without Swara
क ईं वेद सुते सचा पिबन्तं कद्वयो दधे । अयं यः पुरो विभिनत्त्योजसा मन्दानः शिप्र्यन्धसः ॥

कः । ईम् । वेद । सुते । सचा । पिबन्तम् । कत् । वयः । दधे । अयम् । यः । पुरः । विभिनत्ति । वि । भिनत्ति । ओजसा । मन्दानः । शिप्री । अन्धसः ॥२९७॥

Samveda - Mantra Number : 297
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 7;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(सुते) भक्ति रस के उत्पन्न हो जाने पर हे परमेश्वर ! उपासक और आप (सचा) साथ-साथ आनन्द रस और भक्तिरस का (पिबन्तम्) पान करते हैं (ईम) ऐसे प्रभु को (कः) कौन (वेद) जान सकता है ? उपासक (कत्) कितनी (वयः) आयु को (दधे) धारण करता हुआ अर्थात् कितनी आयु तक आपको भक्तिरस की भेंट दे सकता है ? और आप उसे उसकी किस आयु तक आनन्दरस पिला सकते हैं: — इसे भी कौन जान सकता है ? हे परमेश्वर ! आप (अयम्) वे हैं (यः) जो कि (मन्दानः) प्रसन्न होकर (ओजसा) अपने ओज द्वारा आसुरी भावों के (पुरः) गढ़ों को (बिभिनत्ति) तोड़-फोड़ देते है, जैसे कि (सुशिप्री) तेजस्वी मुख वाला सेनापति, (अन्धसः) अन्न से भरे शत्रु के (पुरः) किलों और नगरों को तोड़-फोड़ देता है।
Footnote
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