SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 294

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣म꣡ इ꣡न्द्र꣣ म꣡दा꣢य ते꣣ सो꣡मा꣢श्चिकित्र उ꣣क्थि꣢नः꣣ । म꣡धोः꣢ पपा꣣न꣡ उप꣢꣯ नो꣣ गि꣡रः꣢ शृणु꣣ रा꣡स्व꣢ स्तो꣣त्रा꣡य꣢ गिर्वणः ॥२९४

इ꣣मे꣢ । इ꣣न्द्र । म꣡दा꣢꣯य । ते꣣ । सो꣡माः꣢꣯ । चि꣣कित्रे । उक्थि꣡नः꣢ । म꣡धोः꣢꣯ । प꣣पानः꣢ । उ꣡प꣢꣯ । नः꣣ । गि꣡रः꣢꣯ । शृ꣣णु । रा꣡स्व꣢꣯ । स्तो꣣त्रा꣡य꣢ । गि꣣र्वणः । गिः । वनः ॥२९४॥

Mantra without Swara
इम इन्द्र मदाय ते सोमाश्चिकित्र उक्थिनः । मधोः पपान उप नो गिरः शृणु रास्व स्तोत्राय गिर्वणः ॥२९४

इमे । इन्द्र । मदाय । ते । सोमाः । चिकित्रे । उक्थिनः । मधोः । पपानः । उप । नः । गिरः । शृणु । रास्व । स्तोत्राय । गिर्वणः । गिः । वनः ॥२९४॥

Samveda - Mantra Number : 294
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 7;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमेश्वर ! (इमे) ये (सोमासः) भक्तिरस - जिनमें कि (उक्थिनः) वैदिक भक्ति-सूक्तों द्वारा स्तवन किया जा रहा है, आपकी (मदाय) प्रसन्नता के लिये (चिकित्रे) जाने गए हैं। हमारे (मधोः) मधुर भक्तिरसों का (पपान) पान करते हुए या रक्षा करते हुए आप (नः) हमारी (गिर) स्तुतियों और प्रार्थना-वाणियों को (उप) प्रेम से (शृणु) सुनिये। (गिर्वणः) हे वेद की वाणियों द्वारा सम्यक् भजन करने योग्य ! हमारे (स्तोत्राय) स्तोत्रों अति साम-गानों के प्रतिफल रूप में आप हमें (रास्व) आध्यात्मिक सम्पत्ति प्रदान कीजिये ।
Footnote
N/A