SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 263

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣣त्य꣢मि꣣त्था꣡ वृषे꣢꣯दसि꣣ वृ꣡ष꣢जूतिर्नोऽवि꣣ता꣢ । वृ꣢षा꣣꣬ ह्यु꣢꣯ग्र शृण्वि꣣षे꣡ प꣢रा꣣व꣢ति꣣ वृ꣡षो꣢ अर्वा꣣व꣡ति꣢ श्रु꣣तः꣢ ॥२६३॥

स꣣त्य꣢म् । इ꣣त्था꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । इत् । अ꣣सि । वृ꣡ष꣢꣯जूतिः । वृ꣡ष꣢꣯ । जू꣣तिः । नः । अविता꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । हि । उ꣣ग्र । शृण्विषे꣢ । प꣣राव꣡ति꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । उ꣣ । अर्वाव꣡ति꣢ । श्रु꣣तः꣢ ॥२६३॥

Mantra without Swara
सत्यमित्था वृषेदसि वृषजूतिर्नोऽविता । वृषा ह्युग्र शृण्विषे परावति वृषो अर्वावति श्रुतः ॥

सत्यम् । इत्था । वृषा । इत् । असि । वृषजूतिः । वृष । जूतिः । नः । अविता । वृषा । हि । उग्र । शृण्विषे । परावति । वृषा । उ । अर्वावति । श्रुतः ॥२६३॥

Samveda - Mantra Number : 263
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(सत्यम्) सत्य है कि आप (इत्था) इस प्रकार काम्य पदार्थों की (वृषा इत्) वर्षा अवश्य करते हैं । (वृषजूतिः) तथा सत्य है कि वर्षा करने वाले पदार्थों में आप प्रेरणाएं देते रहते हैं। इस प्रकार (नः) हमारी आप (अविता) रक्षा करते हैं । (उग्र) हे नियमों में दृढ़ रहने वाले प्रभो ! (वृषा) आप ही वर्षा करने वाले हैं । (श्रुतः) आपकी ही यह प्रसिद्धि है । (परावति) दूर-दूर के प्रदेशों में भी आप (हि) ही (वृषा) काम्य पदार्थों की वर्षा करते हैं । (शृण्विषे) वेदों में ऐसा आपके सम्बन्ध में सुना जाता है और (अर्वावति) समीप के प्रदेशों में भी आप ही (वृषा) काम्य पदार्थों की वर्षा करते हैं (श्रुतः) यह भी सुना गया है ।
Footnote
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