SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1842

1871 Mantra
Devata- वायुः Rishi- उलो वातायनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य꣢द꣣दो꣡ वा꣢त ते गृ꣣हे꣢३꣱ऽमृ꣢तं꣣ नि꣡हि꣢तं꣣ गु꣡हा꣢ । त꣡स्य꣢ नो देहि जी꣣व꣡से꣢ ॥१८४२॥

य꣢त् । अ꣣दः꣢ । वा꣣त । ते । गृहे꣢ । अ꣣मृ꣡त꣢म् । अ꣣ । मृ꣡त꣢꣯म् । नि꣡हि꣢꣯तम् । नि । हि꣣तम् । गु꣡हा꣢꣯ । त꣡स्य꣢꣯ । नः꣣ । धेहि । जीव꣡से꣢ ॥१८४२॥

Mantra without Swara
यददो वात ते गृहे३ऽमृतं निहितं गुहा । तस्य नो देहि जीवसे ॥

यत् । अदः । वात । ते । गृहे । अमृतम् । अ । मृतम् । निहितम् । नि । हितम् । गुहा । तस्य । नः । धेहि । जीवसे ॥१८४२॥

Samveda - Mantra Number : 1842
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 7;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(वात) हे सर्वगत, अविद्याविनाशक, प्राणाधार परमेश्वर ! (ते) आप के (गृहे) निवासस्थान हृदय-गृह में, आप का (यद्) जो (अदः) वह (अमृतम्) आनन्दरसामृत (गुहा निहितम्) अभी तक हम उपासकों के लिये छिपा पड़ा है, (तस्य) उसका कुछ अंश, (जीवसे) जीवित रहने के लिये (नः) हमें (धेहि) प्रदान कीजिये ।
[ वातः = जैसे मन्त्र १८३७; १८३८; १८३९ में “आपः” का अर्थ परमेश्वर है। वैसे इन वात मन्त्रों में “वात” का अर्थ भी परमेश्वर है । यजुर्वेद ३२। १ में जैसे परमेश्वर को “आपः” कहा है, वैसे ही परमेश्वर को “वायु” भी कहा है, “तद्वायुः” । वायु और वात पर्यायवाची है । वैदिक साहित्य के अनुसार परमेश्वर के प्रत्यक्षीकरण का स्थान है “हृदय” । हृदय, परमेश्वर का निवास स्थान है, गृह है । परमेश्वर अभी तक उपासकों के हृदयों में छिपा पड़ा है, अभी तक उपासकों को परमेश्वर का प्रत्यक्ष नहीं हुआ । साथ ही परमेश्वर का आनन्दरसामृत भी अभी तक हृदयों में छिपा पड़ा है । मन्त्र में उपासक उस आनन्दरसामृत की अभिलाषा प्रकट कर रहे हैं । ]
अथवा
वातचिकित्सा अर्थात् शुद्ध वात के सेवन तथा प्राणायाम की दृष्टि से :-
(वात) हे वायु ! (ते) तेरे (गृहे) घर में अर्थात् अन्तरिक्ष में, (यद्) जो (अदः) वह (अमृतम्) मरने से बचाने वाला तत्त्व, अर्थात् आक्सीजन (oxygen) गुहा (निहितम्) छिपा पड़ा है, (नः) हमारे (जीवसे) जीवित रहने के लिये, तस्य) उस अमृत तत्त्व का अंश (नः धेहि) हमें प्रदान कर ।
Footnote
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