SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1700

1871 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢माना दि꣣व꣢꣫स्पर्य꣣न्त꣡रि꣢क्षादसृक्षत । पृ꣣थिव्या꣢꣫ अधि꣣ सा꣡न꣢वि ॥१७००॥

प꣡व꣢꣯मानाः । दि꣣वः꣢ । प꣡रि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षात् । अ꣣सृक्षत । पृथिव्याः꣣ । अ꣡धि꣢꣯ । सा꣡न꣢꣯वि ॥१७००॥

Mantra without Swara
पवमाना दिवस्पर्यन्तरिक्षादसृक्षत । पृथिव्या अधि सानवि ॥

पवमानाः । दिवः । परि । अन्तरिक्षात् । असृक्षत । पृथिव्याः । अधि । सानवि ॥१७००॥

Samveda - Mantra Number : 1700
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(पवमानाः) पवित्र करने वाले भक्तिरस, (दिवः परि) मस्तिष्क से, और (अन्तरिक्षात्) हृदयाकाश से, (असृक्षत) प्रकट हो गए हैं, जो मस्तिष्क-और-हृदयाकाश (पृथिव्याः) पार्थिवशरीर के (सानवि अधि) उच्च प्रदेशों में स्थित हैं ।
Footnote
[ मस्तिष्क का सम्बन्ध विचारों से है, और हृदय का भावनाओं से । भक्ति द्वारा, विचार-और-भावनाएँ पवित्र हो जाती हैं ]