SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1696

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
क꣡ ईं꣢ वेद सु꣣ते꣢꣫ सचा꣣ पि꣡ब꣢न्तं꣣ कद्वयो꣢꣯ दधे । अ꣣यं यः पुरो꣢꣯ विभि꣣नत्त्योज꣢꣯सा मन्दा꣣नः꣢ शि꣣प्र्य꣡न्ध꣢सः ॥१६९६॥

कः꣢ । ई꣣म् । वेद । सुते꣢ । स꣡चा꣢꣯ । पि꣡ब꣢꣯न्तम् । कत् । व꣡यः꣢꣯ । द꣣धे । अय꣢म् । यः । पु꣡रः꣢꣯ । वि꣣भि꣡न꣢त्ति । वि꣣ । भि꣡नत्ति꣢ । ओ꣡ज꣢꣯सा । म꣣न्दानः꣢ । शि꣣प्री꣢ । अ꣡न्ध꣢꣯सः ॥१६९६॥

Mantra without Swara
क ईं वेद सुते सचा पिबन्तं कद्वयो दधे । अयं यः पुरो विभिनत्त्योजसा मन्दानः शिप्र्यन्धसः ॥

कः । ईम् । वेद । सुते । सचा । पिबन्तम् । कत् । वयः । दधे । अयम् । यः । पुरः । विभिनत्ति । वि । भिनत्ति । ओजसा । मन्दानः । शिप्री । अन्धसः ॥१६९६॥

Samveda - Mantra Number : 1696
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 3;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(सुते) भक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, हे परमेश्वर ! आप और उपासक (सचा) साथ-साथ भक्तिरस और आनन्दरस का (पिबन्तम्) पान करते हैं, — (ईम्) ऐसे प्रभु को (कः) कोन (वेद) जान सकता है ? ; उपासक (कत्) कितनी (वयः) आयु (दधे) धारण करता हुआ, अर्थात् कितनी आयु तक, आपको भक्तिरस की भेंट दे सकता है, और आप उसे उसकी किस आयु तक आनन्दरस पिला सकते हैं, — इसे भी (कः वेद) कौन जान सकता है ? ; हे परमेश्वर ! आप (अयम्) यह हैं (यः) जो कि (मन्दानः) प्रसन्न होकर, (ओजसा) अपने ओज द्वारा, (पुरः) आसुरी भावों के गढ़ों को (वि भिनत्ति) तोड़-फोड़ देते हैं, जैसे कि (शिप्री) तेजस्वी मुखवाला सेनापति, (अन्धसः) अन्न से भरे (पुरः) शत्रुओं के किलों और नगरों को तोड़-फोड़ देता है ।
Footnote
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