SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1633

1871 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- रेभसूनू काश्यपौ Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
तं꣡ गाथ꣢꣯या पुरा꣣ण्या꣡ पु꣢ना꣣न꣢म꣣꣬भ्य꣢꣯नूषत । उ꣣तो꣡ कृ꣢पन्त धी꣣त꣡यो꣢ दे꣣वा꣢नां꣣ ना꣢म꣣ बि꣡भ्र꣢तीः ॥१६३३॥

तम् । गा꣡थ꣢꣯या । पु꣡राण्या꣢ । पु꣣नान꣢म् । अ꣣भि꣢ । अ꣣नूषत । उत꣢ । उ꣣ । कृपन्त । धीत꣡यः꣢ । दे꣣वा꣡ना꣢म् । ना꣡म꣢꣯ । बि꣡भ्र꣢꣯तीः ॥१६३३॥

Mantra without Swara
तं गाथया पुराण्या पुनानमभ्यनूषत । उतो कृपन्त धीतयो देवानां नाम बिभ्रतीः ॥

तम् । गाथया । पुराण्या । पुनानम् । अभि । अनूषत । उत । उ । कृपन्त । धीतयः । देवानाम् । नाम । बिभ्रतीः ॥१६३३॥

Samveda - Mantra Number : 1633
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 2;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(पुराण्या) सनातन (गाथया) वैदिक-गानों द्वारा, उपासक, (पुनानम्) पवित्र कर वाले (तम्) उस परमेश्वर की (अभि) साक्षात् (अनूषत) स्तुतियां करते हैं, (उत उ) और इस प्रकार (देवानां नाम) भिन्न-भिन्न दैवत-नामों को (बिभ्रतीः) धारण करती हुईं (धीतयः) ध्यानवृत्तियां (कृपन्त) सामर्थ्य वाली होती हैं ।
Footnote
[ दैवत नाम = अभिप्राय यह है कि परमेश्वर की की गई स्तुतियाँ भिन्न-भिन्न दैवत-नामों द्वारा भी होती हैं । वायु, सूर्य, चन्द्र, इन्द्र आदि किसी भी नाम द्वारा, परमेश्वर की स्तुति की जा सकती है। ये सब नाम, आध्यात्मिक दृष्टि में, परमेश्वर के भिन्न-भिन्न गुणों का ही, साक्षात् और परम्परया, वर्णन करते हैं ।