SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1613

1871 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- पर्वतनारदौ Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
स꣡ने꣢मि꣣ त्व꣢म꣣स्म꣡दा अदे꣢꣯वं꣣ कं꣡ चि꣢द꣣त्रि꣡ण꣢म् । सा꣣ह्वा꣡ꣳ इ꣢न्दो꣣ प꣢रि꣣ बा꣢धो꣣ अ꣡प꣢ द्व꣣यु꣢म् ॥१६१३॥

स꣡ने꣢꣯मि । त्वम् । अ꣣स्म꣢त् । आ । अ꣡दे꣢꣯वम् । अ । दे꣣वम् । क꣢म् । चि꣣त् । अत्रि꣡ण꣢म् । सा꣣ह्वा꣢न् । इ꣣न्दो । प꣡रि꣢꣯ । बा꣡धः꣢꣯ । अ꣡प꣢꣯ । द्व꣣यु꣢म् ॥१६१३॥

Mantra without Swara
सनेमि त्वमस्मदा अदेवं कं चिदत्रिणम् । साह्वाꣳ इन्दो परि बाधो अप द्वयुम् ॥

सनेमि । त्वम् । अस्मत् । आ । अदेवम् । अ । देवम् । कम् । चित् । अत्रिणम् । साह्वान् । इन्दो । परि । बाधः । अप । द्वयुम् ॥१६१३॥

Samveda - Mantra Number : 1613
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
हे परमेश्वर ! (त्वम्) आप (सनेमि) सदा से हमारे सखा हैं [ मन्त्र १६१२] आप (अस्मत्) हम से (अप बाधः) उसे हटा दीजिये कि जो (कंचित्) कोई (अदेवम्) आप देव की उपासना नहीं करता, जो कि (अत्रिणाम्) खान-पान के भोगों में ही व्यस्त रहता है । (इन्दो) हे हमारे हृदयाकाशों के चांद ! आप (साह्वान्) पराभव करने वाले हैं, (परि बाधः) और उसे भी हम से परे रखिये जो कि (द्वयुम्) आप की सत्ता के सम्बन्ध में दुविधा में पड़ा हुआ है, या सत्य और अनृत से युक्त है, जो बाहिर से और, तथा भीतर से और है, अर्थात् छली-कपटी है ।
Footnote
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