SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1599

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣य꣡मु꣢ ते꣣ स꣡म꣢तसि क꣣पो꣡त꣢ इव गर्भ꣣धि꣢म् । व꣢च꣣स्त꣡च्चि꣢न्न ओहसे ॥१५९९॥

अ꣣य꣢म् । उ꣣ । ते । स꣡म् । अ꣣तसि । कपो꣡तः꣢ । इ꣣व । गर्भधि꣢म् । ग꣣र्भ । धि꣢म् । व꣡चः꣢꣯ । तत् । चि꣣त् । नः । ओहसे ॥१५९९॥

Mantra without Swara
अयमु ते समतसि कपोत इव गर्भधिम् । वचस्तच्चिन्न ओहसे ॥

अयम् । उ । ते । सम् । अतसि । कपोतः । इव । गर्भधिम् । गर्भ । धिम् । वचः । तत् । चित् । नः । ओहसे ॥१५९९॥

Samveda - Mantra Number : 1599
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 3;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
हे परमेश्वर ! (अयम्) यह प्रजाजन (उ) निश्चय से (ते) आप का है । (समतसि) आप सदा इस प्रजाजन के संग रहते हैं, (इव) जैसे कि (गर्भधिम्) गर्भधारणयोग्य कबूतरी के संग (कपोतः) कबूतर सदा रहता है । तब भी आप (नः) हमारे (तद् वचः) उन प्रार्थना-वचनों को अभी तक (ओहसे) भाररूप में ढोए चले जा रहे हैं, अर्थात् उस भार को आप ने अभी तक उतारा नहीं, हमारी प्रार्थनाओं को अभी तक सफल नहीं किया ।
Footnote
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