SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1578

1871 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा꣢ग्नी तवि꣣षा꣡णि꣢ वाꣳ स꣣ध꣡स्था꣢नि꣣ प्र꣡या꣢ꣳसि च । यु꣣वो꣢र꣣प्तू꣡र्य꣢ꣳ हि꣣त꣢म् ॥१५७८॥

इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣢ग्नीइ꣡ति꣢ । त꣣विषा꣡णि꣢ । वा꣣म् । सध꣡स्था꣢नि । स꣣ध꣢ । स्था꣣नि । प्र꣡या꣢꣯ꣳसि । च꣣ । युवोः꣢ । अ꣣प्तू꣡र्य꣢म् । अ꣣प् । तू꣡र्य꣢꣯म् । हि꣣त꣢म् ॥१५७८॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी तविषाणि वाꣳ सधस्थानि प्रयाꣳसि च । युवोरप्तूर्यꣳ हितम् ॥

इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । तविषाणि । वाम् । सधस्थानि । सध । स्थानि । प्रयाꣳसि । च । युवोः । अप्तूर्यम् । अप् । तूर्यम् । हितम् ॥१५७८॥

Samveda - Mantra Number : 1578
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 1;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्राग्नी) बलशक्ति और ज्ञान-शक्ति से सम्पन्न हे परमेश्वर ! (वाम्) आप की दोनों शक्तियों के (तविषाणि) बल और (प्रयांसि) प्रयास, (सथस्थानि) साथ-साथ रहते हैं, अर्थात् एक-दूसरे के सहायक हैं । (अप्तूर्यम्) कर्मों का त्वरित फल देना (युवोः) आप की इन दोनों शक्तियों के पारस्परिक सहयोग में (हितम्) निहित है ।
Footnote
[ बल है परन्तु प्रयास अर्थात् प्रयत्न नहीं, प्रयत्न है परन्तु तदनुरूप बल नहीं । इस प्रकार अकेली-अकेली शक्ति से शीघ्र फल नहीं मिल सकता । एतदर्थ इन दोनों शक्तियों में समन्वय चाहिये, तभी कर्मों का फल शीघ्र मिल सकता है ]