SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1576

1871 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा꣢ग्नी नव꣣तिं꣡ पुरो꣢꣯ दा꣣स꣡प꣢त्नीरधूनुतम् । सा꣣क꣡मेके꣢꣯न꣣ क꣡र्म꣢णा ॥१५७६॥

इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢ । न꣣वति꣢म् । पु꣡रः꣢꣯ । दा꣣स꣡प꣢त्नीः । दा꣣स꣢ । प꣣त्नीः । अधूनुतम् । साक꣢म् । ए꣡के꣢꣯न । क꣡र्म꣢꣯णा ॥१५७६॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी नवतिं पुरो दासपत्नीरधूनुतम् । साकमेकेन कर्मणा ॥

इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । नवतिम् । पुरः । दासपत्नीः । दास । पत्नीः । अधूनुतम् । साकम् । एकेन । कर्मणा ॥१५७६॥

Samveda - Mantra Number : 1576
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 1;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्राग्नी) बलशक्ति और ज्ञानशक्ति से सम्पन्न हे परमेश्वर ! आप ने (दासपत्नीः) उपक्षय-कारी काम-क्रोध आदि द्वारा पालित (नवतिं पुरः) नब्बे पुरियों को, (एकेन कर्मणा साकम्) अपने एक ही संकल्परूपीकर्म द्वारा (अधूनुतम्) कम्पा दिया है ।
Footnote
[ नवतिं पुरः सूक्ष्मशरीर में १८ तत्त्व होते हैं । ५ कर्मेन्द्रियों की शक्तियाँ ५ ज्ञानेन्द्रियों की शक्तियाँ, १ मन, ५ पंचतन्मात्राएँ, १ अहंकार और १ महत्तत्त्व । इसे ही लिङ्ग शरीर भी कहते हैं “अष्टादशकं लिङ्गम्” । सूक्ष्म शरीर के १८ तत्वों में से प्रत्येक तत्व “वचपर्वा अविद्या से अर्थात् ५ क्लेश से घिरा रहता है” । अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश ये ५ क्लेशो हैं । इस प्रकार १८ × ५ = ९०; ये ही “दासपत्नीः नवतिं पुरः” हैं । मोक्ष के लिये इन ९० पुरियों का अवधूनन आवश्यक होता है ]