SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1575

1871 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र꣡ वा꣢मर्चन्त्यु꣣क्थि꣡नो꣢ नीथा꣣वि꣡दो꣢ जरि꣣ता꣡रः꣢ । इ꣡न्द्रा꣢ग्नी꣣ इ꣢ष꣣ आ꣡ वृ꣢णे ॥१५७५॥

प्र꣢ । वा꣣म् । अर्चन्ति । उक्थि꣡नः꣢ । नी꣣थावि꣢दः꣢ । नी꣣थ । वि꣡दः꣢꣯ । ज꣣रिता꣡रः꣢ । इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢ । इ꣡षः꣢꣯ । आ । वृ꣣णे ॥१५७५॥

Mantra without Swara
प्र वामर्चन्त्युक्थिनो नीथाविदो जरितारः । इन्द्राग्नी इष आ वृणे ॥

प्र । वाम् । अर्चन्ति । उक्थिनः । नीथाविदः । नीथ । विदः । जरितारः । इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । इषः । आ । वृणे ॥१५७५॥

Samveda - Mantra Number : 1575
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 1;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्राग्नी) बलशक्ति और ज्ञानशक्ति से सम्पन्न हे परमेश्वर ! (उक्थिनः) वैदिक सूक्तों के वेत्ता, तथा (नीथाविदः) आचार नीति के नेत्ता (जरितारः) स्तोता लोग, (वाम्) आप के दोनों स्वरूपों की (प्र अर्चन्ति) प्रकृष्ट स्तुतियां करते हैं । (इष) अभीष्ट कामना की प्राप्ति के लिये (आ वृणे) मैं उपासक भी आप के उक्त स्वरूपों का पूर्णतया वरण करता हूँ ।
Footnote
[ ज्ञान के बिना बल, और बल के बिना ज्ञान, — सफलता प्रदान में असमर्थ हैं । दोनों मिल कर यथार्थ सफलता प्रदान करते हैं]