SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1559

1871 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- काकुभः प्रगाथः (विषमा ककुबुष्णिक्, समा सतोबृहती) Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
भ꣣द्रो꣡ नो꣢ अ꣣ग्नि꣡राहु꣢꣯तो भ꣣द्रा꣢ रा꣣तिः꣡ सु꣢भग भ꣣द्रो꣡ अ꣢ध्व꣣रः꣢ । भ꣣द्रा꣢ उ꣣त꣡ प्रश꣢꣯स्तयः ॥१५५९॥

भ꣣द्रः꣢ । नः꣣ । अग्निः꣢ । आ꣡हु꣢꣯तः । आ । हु꣣तः । भद्रा꣢ । रा꣣तिः꣢ । सु꣣भग । सु । भग । भद्रः꣢ । अ꣣ध्वरः꣢ । भ꣣द्राः꣢ । उ꣣त꣢ । प्र꣡श꣢꣯स्तयः । प्र । श꣣स्तयः ॥१५५९॥

Mantra without Swara
भद्रो नो अग्निराहुतो भद्रा रातिः सुभग भद्रो अध्वरः । भद्रा उत प्रशस्तयः ॥

भद्रः । नः । अग्निः । आहुतः । आ । हुतः । भद्रा । रातिः । सुभग । सु । भग । भद्रः । अध्वरः । भद्राः । उत । प्रशस्तयः । प्र । शस्तयः ॥१५५९॥

Samveda - Mantra Number : 1559
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 3;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(आहुतः) आत्मसमर्पणरूपी आहुतियां पाया हुआ (अग्निः) जगन्नायक (नः) हमारा (भद्रः) कल्याण करता और हमें सुख पहुंचाता है । (रातिः) उस के दिये दान (भद्रा) हमारा कल्याण करते और हमें सुख पहुँचाते हैं । (सुभग) हे सौभाग्यों से सम्पन्न परमेश्वर ! (अध्वरः) हिंसारहित उपासनायज्ञ (भद्रः) हमारा कल्याण करता और हमें सुख पहुँचाता है । (उत) तथा (प्रशस्तयः) परमेश्वर की की गई प्रशस्तियां हमारा कल्याण करती और हमें सुख पहुंचाती हैं ।
Footnote
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