SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 151

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः सुकक्षो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣ष्टा꣡ होत्रा꣢꣯ असृक्ष꣣ते꣡न्द्रं꣢ वृ꣣ध꣡न्तो꣢ अध्व꣣रे꣢ । अ꣡च्छा꣢वभृ꣣थ꣡मोज꣢꣯सा ॥१५१॥

इ꣣ष्टाः꣢ । हो꣡त्राः꣢꣯ । अ꣣सृक्षत । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । वृ꣣ध꣡न्तः꣢ । अ꣣ध्वरे꣢ । अ꣡च्छ꣢꣯ । अ꣣वभृथ꣢म् । अ꣣व । भृथ꣢म् । ओ꣡ज꣢꣯सा ॥१५१॥

Mantra without Swara
इष्टा होत्रा असृक्षतेन्द्रं वृधन्तो अध्वरे । अच्छावभृथमोजसा ॥

इष्टाः । होत्राः । असृक्षत । इन्द्रम् । वृधन्तः । अध्वरे । अच्छ । अवभृथम् । अव । भृथम् । ओजसा ॥१५१॥

Samveda - Mantra Number : 151
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(होत्राः) वेद वाणियों का जब (इष्टाः) सत्सङ्ग किया जाता है, अर्थात् वेद का जब स्वाध्याय-यज्ञ किया जाता है, तब वेदवाणियाँ (अध्वरे) हिंसारहित-स्वाध्याय-यज्ञ में (असृक्षत) भक्तिरस का सर्जन करती हैं, और (इन्द्रम्) परमेश्वर के गुणों को (वृधन्तः) बढ़ाती हैं, बढ़ बढ़ कर वर्णन करती हैं। इस प्रकार (अवभृथम्) रक्षा करने वाले और भरण पोषण करने वाले परमेश्वर की (अच्छा) ओर (ओजसा) वेग से वेदवाणियां ले चलती है ।
Footnote
[ होत्रा = मन्त्र जिन द्वारा आहुतियां दी जाती हैं । होत्रा = (निधः १ - ११) अवभृथम्=अव=रक्षा + भृथ = भरण-पोषण ]