SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1503

1871 Mantra
Devata- विश्वे देवाः Rishi- अग्निस्तापसः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ वि꣡श्वे꣢भिर꣣ग्नि꣢भि꣣र्जो꣢षि꣣ ब्र꣡ह्म꣢ सहस्कृत । ये꣡ दे꣢व꣣त्रा꣢꣫ य आ꣣यु꣢षु꣣ ते꣡भि꣢र्नो महया꣣ गि꣡रः꣢ ॥१५०३

अ꣡ग्ने꣢꣯ । वि꣡श्वे꣢꣯भिः । अ꣣ग्नि꣡भिः꣢ । जो꣡षि꣢꣯ । ब्र꣡ह्म꣢꣯ । स꣣हस्कृत । सहः । कृत । ये । दे꣣वत्रा꣢ । ये । आ꣣यु꣡षु꣢ । ते꣡भिः꣢꣯ । नः꣣ । महय । गि꣡रः꣢꣯ ॥१५०३॥

Mantra without Swara
अग्ने विश्वेभिरग्निभिर्जोषि ब्रह्म सहस्कृत । ये देवत्रा य आयुषु तेभिर्नो महया गिरः ॥१५०३

अग्ने । विश्वेभिः । अग्निभिः । जोषि । ब्रह्म । सहस्कृत । सहः । कृत । ये । देवत्रा । ये । आयुषु । तेभिः । नः । महय । गिरः ॥१५०३॥

Samveda - Mantra Number : 1503
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 2;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(सहस्कृत) हे साहस और धैर्य-पूर्वक योगसाधना द्वारा प्रकट किये गए (अग्ने) ज्ञानमय जगन्नेता ! (नः) हमारे (ब्रह्म) ब्रह्मप्रतिपादक वैदिक स्तवनों को आप (जोषि) प्रेमपूर्वक स्वीकार कीजिये, और (ये) जो ज्ञानाग्नियां (देवत्रा) देवकोटि के लोगों में हैं, और (ये) जो ज्ञानाग्नियां (आयुषु) मानुषकोटि के मननशील लोगों में हैं, (तेभिः) उन (विश्वेभिः अग्निभिः) सब ज्ञानाग्नियों से हमें सम्बद्ध कीजिये, और इस प्रकार (नः) हमारी (गिरः) स्तुतिवाणियों को (महय) महिमा सम्पन्न कीजिये ।
Footnote
[ देवत्रा = आध्यात्मिक देवों में। आयुषु = सांसारिक मनुष्यों में । ज्ञानाग्नि; यथाः–“ज्ञानाग्निः सर्व-कर्माणि भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन” (गीता) । मन्त्र में आध्यात्मिक तथा सांसारिक ज्ञानों की प्राप्ति की प्रार्थना हैं, अर्थात् अभ्युदय और निःश्रेयस की प्राप्ति की प्रार्थना है ]