SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1499

1871 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ नो꣢ भज पर꣣मे꣡ष्वा वाजे꣢꣯षु मध्य꣣मे꣡षु꣢ । शि꣢क्षा꣣ व꣢स्वो꣣ अ꣡न्त꣢मस्य ॥१४९९॥

आ꣢ । नः꣣ । भज । परमे꣡षु꣢ । आ । वाजे꣡षु꣢꣯ । म꣣ध्यमे꣡षु꣢ । शि꣡क्ष꣢꣯ । व꣡स्वः꣢꣯ । अ꣡न्त꣢꣯मस्य ॥१४९९॥

Mantra without Swara
आ नो भज परमेष्वा वाजेषु मध्यमेषु । शिक्षा वस्वो अन्तमस्य ॥

आ । नः । भज । परमेषु । आ । वाजेषु । मध्यमेषु । शिक्ष । वस्वः । अन्तमस्य ॥१४९९॥

Samveda - Mantra Number : 1499
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 1;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
हे परमेश्वर ! (नः) हम सब को, (परमेषु वाजेषु) सर्वोत्कृष्ट धनों के सम्बन्ध में (आ भज) हिस्सेदार कीजिये, (मध्यमेषु) मध्यकोटि के धनों में हमें (आ भज) हिस्सेदार कीजिये, और (अन्तमस्य) निचली कोटि के (वस्वः) धन का भाग भी (शिक्षा) हम सब को दीजिये ।
Footnote
[ सर्वोत्कृष्ट धन है आध्यात्मिक; यथा श्रद्धा, भक्ति, स्तुति, उपासना, धारणा, ध्यान, समाधि । मध्यम कोटि का धन है मानसिक धन; यथा स्वाध्याय, मनन, सदुपदेश श्रवण आदि । निचली कोटि का धन है शारीरिक ; यथा स्वास्थ्य, दीर्घायु, नीरोगता, अन्न, वस्त्र, मकान, प्राकृतिक ऐश्वर्य ]