SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1498

1871 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वि꣣भक्ता꣡सि꣢ चित्रभानो꣣ सि꣡न्धो꣢रू꣣र्मा꣡ उ꣢पा꣣क꣢ आ । स꣣द्यो꣢ दा꣣शु꣡षे꣢ क्षरसि ॥१४९८॥

वि꣣भक्ता꣢ । वि꣣ । भक्ता꣢ । अ꣡सि । चित्रभानो । चित्र । भानो । सि꣡न्धोः꣢꣯ । ऊ꣣र्मौ꣢ । उ꣣पाके꣢ । आ । स꣣द्यः꣢ । स꣣ । द्यः꣢ । दा꣣शु꣡षे꣢ । क्ष꣣रसि ॥१४९८॥

Mantra without Swara
विभक्तासि चित्रभानो सिन्धोरूर्मा उपाक आ । सद्यो दाशुषे क्षरसि ॥

विभक्ता । वि । भक्ता । असि । चित्रभानो । चित्र । भानो । सिन्धोः । ऊर्मौ । उपाके । आ । सद्यः । स । द्यः । दाशुषे । क्षरसि ॥१४९८॥

Samveda - Mantra Number : 1498
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 1;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(चित्रभानो) हे अद्भुत प्रभावाले परमेश्वर ! आप (विभक्ता असि) धनों का विभाजन करते हैं (आ) जैसे कि (सिन्धोः) बहती हुई नदी के (उपाके) समीप के खेतों में (ऊर्मा) नदी के जलप्रवाह का विभाजन किया जाता है । हे परमेश्वर ! (दाशुणे) दानशील व्यक्ति के निमित्त आप (सद्यः) शीघ्र (क्षरसि) धन का प्रवाह करते हैं ।
Footnote
[ ऊर्मा = ऊर्मिम् (सायण) । परमेश्वर की इच्छा है कि समग्र प्रजाजनों में उस के धन का समुचित विभाजन हो। इसी उद्देश्य के लिये वह दानशील व्यक्ति के प्रति धन का प्रवाह करता है । ]