SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1470

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
के꣣तुं꣢ कृ꣣ण्व꣡न्न꣢के꣣त꣢वे꣣ पे꣡शो꣢ मर्या अपे꣣श꣡से꣢ । स꣢मु꣣ष꣡द्भि꣢रजायथाः ॥१४७०॥

के꣣तु꣢म् । कृ꣣ण्व꣢न् । अ꣣केत꣡वे꣢ । अ꣣ । केत꣡वे꣢ । पे꣡शः꣢꣯ । म꣣र्याः । अपेश꣡से꣢ । अ꣣ । पेश꣡से꣣ । सम् । उ꣣ष꣡द्भिः꣢ । अ꣣जायथाः ॥१४७०॥

Mantra without Swara
केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे । समुषद्भिरजायथाः ॥

केतुम् । कृण्वन् । अकेतवे । अ । केतवे । पेशः । मर्याः । अपेशसे । अ । पेशसे । सम् । उषद्भिः । अजायथाः ॥१४७०॥

Samveda - Mantra Number : 1470
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(मर्याः) हे उपासक जनो ! परमेश्वर, (अकेतवे) प्रज्ञा-रहित उपासक के लिये (केतुम्) योगज प्रज्ञा को (कृण्वन्) प्रकट करता हुआ, तथा (अपेशसे) योग सम्बन्धी रूप से रहित उपासक के लिये (पेशः कृण्वन्) नया योग सम्बन्धी रूप को प्रकट करता हुआ, (उषद्भिः) उषाकालों में (सम् अजायथाः) सम्यक् प्रकट होजाता है ।
Footnote
[ योगी के लिये, योगाभ्यास का काल रात्रि के १२ बजे के बाद का उपयुक्त गिना गया है । १२ बजे के बाद और सूर्योदय से पूर्व योगाभ्यास करना चाहिये । यह काल शान्ति का काल है । सूर्योदय काल के आरम्भ होने से पूर्व परमेश्वर के साक्षात्कार का वर्णन मन्त्र में किया है ]