SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1469

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यु꣣ञ्ज꣡न्त्य꣢स्य꣣ का꣢म्या꣣ ह꣢री꣣ वि꣡प꣢क्षसा꣣ र꣡थे꣢ । शो꣡णा꣢ धृ꣣ष्णू꣢ नृ꣣वा꣡ह꣢सा ॥१४६९॥

यु꣣ञ्ज꣡न्ति꣢ । अ꣣स्य । का꣡म्या꣢꣯ । हरी꣢꣯इ꣡ति꣢ । वि꣡प꣢꣯क्षसा । वि । प꣣क्षसा । र꣡थे꣢꣯ । शो꣡णा꣢꣯ । धृ꣣ष्णू꣡इति꣢ । नृ꣣वा꣡ह꣢सा । नृ꣣ । वा꣡ह꣢꣯सा ॥१४६९॥

Mantra without Swara
युञ्जन्त्यस्य काम्या हरी विपक्षसा रथे । शोणा धृष्णू नृवाहसा ॥

युञ्जन्ति । अस्य । काम्या । हरीइति । विपक्षसा । वि । पक्षसा । रथे । शोणा । धृष्णूइति । नृवाहसा । नृ । वाहसा ॥१४६९॥

Samveda - Mantra Number : 1469
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(अस्य काम्या) इस योगी को योगसाधना के लिये चाही गई, (हरी) चित्त को अपनी ओर आकृष्ट करने वाली, अर्थात् चित्त को अन्तर्मुख कर देने वाली (रथे) शरीर-रथ में (विपक्षसा) सुषुम्णा = नाड़ी के दो पक्षों में लगी हुई (शोणा) रंग-बिरंगी (धृष्णू) मजबूत (नृवाहसा) तथा योग के नेताओं को उन के उद्देश्य तक पहुंचाने वाली, इडा और पिङ्गला नाड़ियों को, योगी-जन, (युञ्जन्ति) अपने चित्तों के साथ धारणा ध्यान द्वारा युक्त करते हैं, सम्बद्ध करते हैं ।
Footnote
[ इडा, पिङ्गला = सुषुम्णा, इडा पिंगला इन तीनों का योग के साथ सम्बन्ध है । सुषुम्णा नाडी अतिसूक्ष्म नली के सदृश हैं, जो गुदा के निकट से, मेरुदण्ड के भीतर होती हुई, मस्तिष्क के ऊपर तक चली गई है। गुदास्थान के निकट से सुषुम्णा के वामभाग से इडा और दक्षिणभाग से पिङ्गला नासिकामूल पर्यन्त मस्तक तक चली गई है। भ्रूमध्य में ये तीनों नाड़ियां परस्पर मिल गई हैं । सुषुम्णा को सरस्वती, इडा को गङ्गा, तथा पिङ्गला को यमुना भी कहते हैं। इडा को चन्द्रनाड़ी और पिङ्गला को सूर्यनाडी भी कहते हैं ]