SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1451

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सुकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
न꣢व꣣ यो꣡ न꣢व꣣तिं꣡ पुरो꣢꣯ बि꣣भे꣡द꣢ बा꣣꣬ह्वो꣢꣯जसा । अ꣡हिं꣢ च वृत्र꣣हा꣡व꣢धीत् ॥१४५१॥

न꣡व꣢꣯ । यः । न꣣व꣢तिम् । पु꣡रः꣢꣯ । बि꣣भे꣡द꣢ । बा꣣ह्वो꣢जसा । बा꣣हु꣢ । ओ꣣जसा । अ꣡हि꣢꣯म् । च । वृत्रहा꣢ । वृ꣣त्र । हा꣢ । अ꣣वधीत् ॥१४५१॥

Mantra without Swara
नव यो नवतिं पुरो बिभेद बाह्वोजसा । अहिं च वृत्रहावधीत् ॥

नव । यः । नवतिम् । पुरः । बिभेद । बाह्वोजसा । बाहु । ओजसा । अहिम् । च । वृत्रहा । वृत्र । हा । अवधीत् ॥१४५१॥

Samveda - Mantra Number : 1451
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 2;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(यः) जिस परमेश्वर ने (बाह्वोजसा) निर्माण और संहाररूपी बाहुओं के ओज द्वारा (नव) ९ और (नवतिम्) ९० वर्षों से उपलक्षित (पुरः) पुरियों अर्थात् काम-क्रोध आदि के गढ़ों अर्थात् शरीरों को (बिभेद) तोड़-फोड़ कर जीवात्माओं को मुक्त किया है, उसी परमेश्वर ने इन पुरियों अर्थात् शरीरों में रहने वाले (अहिं च) कामक्रोध, रागद्वेष, ईर्ष्या आदि सांपों का भी (अवधीत्) वध किया है, क्योंकि परमेश्वर (वृत्रहा) इन आवरक-शक्तियों का हनन करने वाला है ही ।
Footnote
[ मनुष्य की ओसतन आयु १०० वर्ष कही गई है । मातृगर्भवास के लगभग एक वर्ष के काल से पृथक् ९९ वर्ष सामान्य जीवन-काल है । इस प्रकार जीवनकाल १०० वर्षों का होता है । काम-क्रोध आदि को सांप कहा है । इन सांपों का विनाश कर के परमेश्वर, इन के गढ़ों अर्थात् शरीरों को तोड़-फोड़ देता, और अन्ततः योगियों के जीवात्माओं को मुक्त कर देता है । जन्म के पश्चात् ९९ वर्षों से उपलक्षित मानुषशरीरों को तोड़-फोड़ कर योगियों के मोक्ष का वर्णन मन्त्र में हुआ है ]