SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1358

1871 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- पराशरः शाक्त्यः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स꣡ पु꣢ना꣣न꣢꣫ उप꣣ सू꣢रे꣣ द꣡धा꣢न꣣ ओ꣡भे अ꣢꣯प्रा꣣ रो꣡द꣢सी꣣ वी꣡ ष आ꣢꣯वः । प्रि꣣या꣢ चि꣣द्य꣡स्य꣢ प्रिय꣣सा꣡स꣢ ऊ꣣ती꣢ स꣣तो꣡ धनं꣢꣯ का꣣रि꣢णे꣣ न꣡ प्र य꣢꣯ꣳसत् ॥१३५८॥

सः । पु꣣नानः꣢ । उ꣡प꣢꣯ । सू꣡रे꣢꣯ । द꣡धा꣢꣯नः । आ । उ꣣भे꣡इति꣢ । अ꣣प्राः । रो꣡दसी꣣इ꣡ति꣢ । वि । सः । आ꣣वरि꣡ति꣢ । प्रि꣣या꣢ । चि꣣त् । य꣡स्य꣢꣯ । प्रि꣣यसा꣡सः꣢ । ऊ꣣ती꣢ । स꣣तः꣢ । ध꣡न꣢꣯म् । का꣣रि꣡णे꣢ । न । प्र । य꣣ꣳसत् ॥१३५८॥

Mantra without Swara
स पुनान उप सूरे दधान ओभे अप्रा रोदसी वी ष आवः । प्रिया चिद्यस्य प्रियसास ऊती सतो धनं कारिणे न प्र यꣳसत् ॥

सः । पुनानः । उप । सूरे । दधानः । आ । उभेइति । अप्राः । रोदसीइति । वि । सः । आवरिति । प्रिया । चित् । यस्य । प्रियसासः । ऊती । सतः । धनम् । कारिणे । न । प्र । यꣳसत् ॥१३५८॥

Samveda - Mantra Number : 1358
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 2;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(यस्य सतः) जिस सत्स्वरूप परमेश्वर की (ऊती) रक्षाएँ, (प्रिया चित्) सर्वप्रिय, तथा (प्रियसासः) प्रिय अर्थात् अभीष्टों का प्रदान करती हैं, वह परमेश्वर, (कारिणे) उपासना-यज्ञ के अनुष्ठाता के लिये, (धनम्) आध्यात्मिक धन (प्र यंसत्) प्रदान करता है, (न) जैसे कि (कारिणे) कर्मकर को (धनम्) उस का वेतन-धन दिया जाता है। (सः) वह परमेश्वर (पुनानः) पवित्र करता है, (सूरे) सूर्य (उप दधानः) शासकरूप में स्थित है, (उभे रोदसी) द्युलोक और भूलोक इन दोनों में (आ अप्राः) भरपूर है, (च) और (वि आवः) इन पर पड़े आवरणों को हटाता है ।
Footnote
[ वि भावः = रात्रि के समय पृथिवी पर अन्धकार का आवरण होता है, और दिन के समय द्युलोक पर सूर्य के प्रकाश का आवरण होता है, तथा प्रलयकाल में सब पर प्रलय का आवरण होता है । प्रियसासः = प्रिय + षणु दाने ]