SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1232

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- देवातिथिः काण्वः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
य꣢द्वा꣣ रु꣢मे꣣ रु꣡श꣢मे꣣ श्या꣡व꣢के꣣ कृ꣢प꣣ इ꣡न्द्र꣢ मा꣣द꣡य꣢से꣣ स꣡चा꣢ । क꣡ण्वा꣢सस्त्वा꣣ स्तो꣡मे꣢भि꣣र्ब्र꣡ह्म꣢वाहस꣣ इ꣡न्द्रा य꣢꣯च्छ꣣न्त्या꣡ ग꣢हि ॥१२३२॥

यत् । वा꣣ । रु꣡मे꣢꣯ । रु꣡श꣢꣯मे । श्या꣡व꣢꣯के । कृ꣡पे꣢꣯ । इ꣡न्द्र꣢꣯ । मा꣣द꣡य꣢से । स꣡चा꣢꣯ । क꣡ण्वा꣢꣯सः । त्वा꣣ । स्तो꣡मे꣢꣯भिः । ब्र꣡ह्म꣢꣯वाहसः । ब्र꣡ह्म꣢꣯ । वा꣣हसः । इ꣡न्द्र꣢꣯ । आ । य꣣च्छन्ति । आ꣢ । ग꣢हि ॥१२३२॥

Mantra without Swara
यद्वा रुमे रुशमे श्यावके कृप इन्द्र मादयसे सचा । कण्वासस्त्वा स्तोमेभिर्ब्रह्मवाहस इन्द्रा यच्छन्त्या गहि ॥

यत् । वा । रुमे । रुशमे । श्यावके । कृपे । इन्द्र । मादयसे । सचा । कण्वासः । त्वा । स्तोमेभिः । ब्रह्मवाहसः । ब्रह्म । वाहसः । इन्द्र । आ । यच्छन्ति । आ । गहि ॥१२३२॥

Samveda - Mantra Number : 1232
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 7;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
हे परमेश्वर ! (यद्वा) यद्यपि आप (हमे) शाब्दिक स्तुति करने वाले, (रुशमे) शाब्दिक स्तुति के साथ-साथ शम-दम आदि पर चलाने वाले, (श्यावके) क्रिया शील अर्थात् उद्यमी तथा (कृपे) कृपाशील, — इन सब व्यक्तियों में (सचा) सम्बद्ध हुए, इन में वर्तमान हुए, इन्हें (मादयसे) प्रसन्न रखते तथा आप स्वयं प्रसन्न रहते हैं, तथापि (इन्द्र) हे परमेश्वर ! (कण्वासः) मेधावी और (ब्रह्मवाहसः) आप ब्रह्म का वहन करने वाले उपासक ही, (त्वा) आप को, (आ यच्छन्ति) पूर्णतया नियन्त्रित कर लेते हैं, अपने वश में कर लेते हैं, अतः आप (आ गहि) इन्हें प्राप्त होते हैं ।
Footnote
[ रुमे = रु (शब्दे) + मा (लक्ष्मी, सम्पत्ति) । मौखिक स्तुति करना, — यह ही जिन की आध्यात्मिक सम्पत्ति है । रुशमे = रु (शब्दे) + शम । मौखिक स्तुति तथा शम दम का अभ्यास करने वाले । श्यावके = श्यैङ् गतो । कण्वासः = मेधाविनः (निघं० ३। १५), अर्थात् कण-कण कर के आध्यात्मिक शक्तियों का उपार्जन करने वाले ]