SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1147

1871 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा या꣢꣯हि धि꣣ये꣢षि꣣तो꣡ विप्र꣢꣯जूतः सु꣣ता꣡व꣢तः । उ꣢प꣣ ब्र꣡ह्मा꣢णि वा꣣घ꣡तः꣢ ॥११४७॥

इ꣡न्द्र꣢꣯ । आ । या꣣हि । धिया꣢ । इ꣣षितः꣢ । वि꣡प्र꣢꣯जूतः । वि꣡प्र꣢꣯ । जू꣣तः । सु꣡ता꣢वतः । उ꣡प꣢꣯ । ब्र꣡ह्मा꣢꣯णि । वा꣣घ꣡तः꣢ ॥११४७॥

Mantra without Swara
इन्द्रा याहि धियेषितो विप्रजूतः सुतावतः । उप ब्रह्माणि वाघतः ॥

इन्द्र । आ । याहि । धिया । इषितः । विप्रजूतः । विप्र । जूतः । सुतावतः । उप । ब्रह्माणि । वाघतः ॥११४७॥

Samveda - Mantra Number : 1147
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 3;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमेश्वर ! (आ याहि) आप हमारे हृदयों में प्रक्ट हूजिये । (धियेषितः) हम अपनी बुद्धियों और कर्मों द्वारा आप को चाहते हैं । (विप्रजूतः) हम विप्रों द्वारा आप प्रेरित किये गए हैं । (सुतावतः) पुत्रों वाले या भक्तिरस से सम्पन्न, (वाधतः) उपासना यज्ञ की धुरा का वहन करने वाले उपासकों के, (ब्रह्माणि) ब्रह्म प्रतिपादक वैदिक स्तोत्रों को, आप (उप) समीपता से सुनिये ।
Footnote
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