SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 101

1871 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- त्रित आप्त्यः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
ज꣣ज्ञानः꣢ स꣣प्त꣢ मा꣣तृ꣡भि꣢र्मे꣣धा꣡माशा꣢꣯सत श्रि꣣ये꣢ । अ꣣यं꣢ ध्रु꣣वो꣡ र꣢यी꣣णां꣡ चि꣢केत꣣दा꣢ ॥१०१॥

ज꣣ज्ञानः꣢ । स꣣प्त꣢ । मा꣣तृ꣡भिः꣢ । मे꣣धा꣢म् । आ । अ꣣शासत । श्रिये꣢ । अ꣣य꣢म् । ध्रु꣣वः꣢ । र꣣यीणा꣢म् । चि꣣केतत् । आ꣢ ॥१०१॥

Mantra without Swara
जज्ञानः सप्त मातृभिर्मेधामाशासत श्रिये । अयं ध्रुवो रयीणां चिकेतदा ॥

जज्ञानः । सप्त । मातृभिः । मेधाम् । आ । अशासत । श्रिये । अयम् । ध्रुवः । रयीणाम् । चिकेतत् । आ ॥१०१॥

Samveda - Mantra Number : 101
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 11;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
सुपथ का नेता प्रभु, (मातृभिः) मातृरूप (सप्त) सात वैदिक छन्दों वाली वैदिक वाणियों द्वारा, (जज्ञानः) प्रकट होता है, और उपासक की (श्रिये) शोभा ज्या और आध्यात्मिक सम्पत्ति को बढ़ाने के लिये, प्रभु, उपासक की (मेधाम्) मेधा पर (आशासत) पूर्ण शासन करता है । (अयम्) यह प्रभु, उपासक के लिये, (रयीणाम्) सब सम्पत्तियों में (ध्रुवः) स्थिर सम्पत्ति है । प्रभु (आ चिकेतत्) सर्वज्ञ है, और उपासक को यथार्थज्ञान प्रदान करता है ।
Footnote
[ वेदवाणी को “माता” कहा भी है, यथा- “स्तुता मया वरदा वेदमाता !” अथर्व० १९। ७१। १) ]