SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

Samveda Mantra 1

1871 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡ या꣢हि वी꣣त꣡ये꣢ गृणा꣣नो꣢ ह꣣व्य꣡दा꣢तये । नि꣡ होता꣢꣯ सत्सि ब꣣र्हि꣡षि꣢ ॥१॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ । या꣣हि । वीत꣡ये꣢ । गृ꣣णानः꣢ । ह꣣व्य꣡दा꣢तये । ह꣣व्य꣢ । दा꣣तये । नि꣢ । हो꣡ता꣢꣯ । स꣣त्सि । बर्हि꣡षि꣢ ॥१॥

Mantra without Swara
अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये । नि होता सत्सि बर्हिषि ॥

अग्ने । आ । याहि । वीतये । गृणानः । हव्यदातये । हव्य । दातये । नि । होता । सत्सि । बर्हिषि ॥१॥

Samveda - Mantra Number : 1
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 1;

SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand)

हिन्दी
SamVeda Adhyatmik Bhashya (Pdt. Vishvanatha Vidya Martand) - हिन्दी
Meaning
(अग्ने) हे जगत् अग्रणी अर्थात् सर्वश्रेष्ठ नेता ! (आ याहि) आइये, प्रकट् हूजिए हमारे हृदयों में, (वीतये) हम उपासकों के जीवनों में प्रगति देने के लिये, हमारे सब कार्यों में व्याप्त हो जाने के लिये, हमें नया आध्यात्मिक जन्म देने के लिये, हम में कान्ति पैदा करने के लिये, हमारे दुर्गुणों को परास्त करने के लिये, हमारे पापों को भस्म कर देने के लिये, (गृणानः) आप गुरुवत उपदेश करते हो, अनादि गुरु हो (हव्यदातये) दानयोग्य और भोगयोग्य वस्तुएँ देने के लिये । (होता) आप अपनी ओर उपासक का आह्वान करते, दाता और चराचर के अत्ता हो । आप हमारे (बर्हिषि) हृदयासनों पर (नि सत्सि) निरन्तर विद्यमान हों ।
Footnote
[ अग्ने = अग्रणीर्भवति (निरु० अ० ७, पा० ४, खं० १५) । वीतये = वी गति, व्याप्ति, प्रजन, कान्ति, असन, खादन । गृणानः गृविज्ञाने (चुरादि), तथा “पूर्वेषामपि गुरुः कालेनानवच्छेदात्” (योग १। २६) । हव्य = हु दाने, अदने, आदाने ॥ होता = ह्वेञ् शब्दे, तथा होतुः ह्वातव्यस्य (निरु० ४। ४।२५) । ]