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Samveda Mantra 969

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣡ हि ष्मा꣢꣯ जरि꣣तृ꣢भ्य꣣ आ꣢꣫ वाजं꣣ गो꣡म꣢न्त꣣मि꣡न्व꣢ति । प꣡व꣢मानः सह꣣स्रि꣡ण꣢म् ॥९६९॥

सः । हि । स्म꣣ । जरितृ꣡भ्यः꣢ । आ । वा꣡ज꣢꣯म् । गो꣡म꣢꣯न्तम् । इ꣡न्व꣢꣯ति । प꣡व꣢꣯मानः । स꣣हस्रि꣡ण꣢म् ॥९६९॥

Mantra without Swara
स हि ष्मा जरितृभ्य आ वाजं गोमन्तमिन्वति । पवमानः सहस्रिणम् ॥

सः । हि । स्म । जरितृभ्यः । आ । वाजम् । गोमन्तम् । इन्वति । पवमानः । सहस्रिणम् ॥९६९॥

Samveda - Mantra Number : 969
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

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1 Bhashyas
Meaning
(पवमानः) चित्त और आत्मा की शुद्धि करनेवाला (स हि) वह सोम अर्थात् जगत् को उत्पन्न करनेवाला परमेश्वर(जरितृभ्यः) स्तोताओं के लिए (सहस्रिणम्) हजार संख्यावाले, (गोमन्तम्) प्रशस्त गाय, प्रशस्त वाणी आदि से युक्त (वाजम्) धन को, अथवा (गोमन्तम्) अन्तःप्रकाशयुक्त (वाजम्) आत्मबल को (आ इन्वति स्म) प्राप्त कराता है ॥२॥
Essence
प्रेय मार्ग का और श्रेय मार्ग का अवलम्बन करनेवाले लोगों से ध्यान किया हुआ परमेश्वर उन्हें मनोवाञ्छित सब श्रेय और प्रेय प्रदान कर देता है ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा के उपकारों का वर्णन है।