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Samveda Mantra 911

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
रा꣡जा꣢ना꣣व꣡न꣢भिद्रुहा ध्रु꣣वे꣡ सद꣢꣯स्युत्त꣣मे꣢ । स꣣ह꣡स्र꣢स्थूण आशाते ॥९११॥

रा꣡जा꣢꣯नौ । अ꣡न꣢꣯भिद्रुहा । अन् । अ꣣भिद्रुहा । ध्रुवे꣢ । स꣡द꣢꣯सि । उ꣣त्तमे꣢ । स꣣ह꣡स्र꣢स्थूणे । स꣣ह꣡स्र꣢ । स्थू꣣णे । आशातेइ꣡ति꣢ ॥९११॥

Mantra without Swara
राजानावनभिद्रुहा ध्रुवे सदस्युत्तमे । सहस्रस्थूण आशाते ॥

राजानौ । अनभिद्रुहा । अन् । अभिद्रुहा । ध्रुवे । सदसि । उत्तमे । सहस्रस्थूणे । सहस्र । स्थूणे । आशातेइति ॥९११॥

Samveda - Mantra Number : 911
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

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1 Bhashyas
Meaning
प्रथम—आत्मा और मन के पक्ष में। (अनभिद्रुहा) द्रोह न करनेवाले, (राजानौ) राजाओं के समान विद्यमान आत्मा और मन (ध्रुवे) दृढ़ अङ्गोंवाले, (उत्तमे) सर्वोत्कृष्ट, (सहस्रस्थूणे) हड्डीरूप बहुत सारे खम्भोंवाले (सदसि) देहरूप घर में (आशाते) निवास करते हैं ॥ द्वितीय—राजा और प्रधानमन्त्री के पक्ष में। (अनभिद्रुहा) प्रजा से द्रोह न करनेवाले, (राजानौ) राष्ट्र के उच्चपदों पर विराजमान राजा और प्रधानमन्त्री (धुवे) स्थिर, (उत्तमे) सर्वोत्कृष्ट, (सहस्रस्थूणे) हजार खम्भोंवाले (सदसि) सभागृह में (आशाते) आकर बैठते हैं ॥२॥ यहाँ श्लेषालङ्कार है ॥२॥
Essence
जैसे आत्मा और मन मनुष्य के जीवन को उन्नत करते हैं, वैसे ही राजा और प्रधानमन्त्री राष्ट्र के जीवन को उन्नत करें ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः वही विषय है।