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Samveda Mantra 89

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡ग꣢न्म वृत्र꣣ह꣡न्त꣢मं꣣ ज्ये꣡ष्ठ꣢म꣣ग्नि꣡मान꣢꣯वम् । य꣡ स्म꣢ श्रु꣣त꣡र्व꣢न्ना꣣र्क्षे꣢ बृ꣣ह꣡द꣢नीक इ꣣ध्य꣡ते꣢ ॥८९॥

अ꣡ग꣢꣯न्म । वृ꣣त्रह꣡न्त꣢मम् । वृ꣣त्र । ह꣡न्त꣢꣯मम् । ज्ये꣡ष्ठ꣢꣯म् । अ꣣ग्नि꣢म् । आ꣡न꣢꣯वम् । यः । स्म꣣ । श्रुत꣡र्व꣢न् । आ꣣र्क्षे꣢ । बृ꣣ह꣡द꣢नीकः । बृ꣣ह꣢त् । अ꣣नीकः । इध्य꣡ते꣢ ॥८९॥

Mantra without Swara
अगन्म वृत्रहन्तमं ज्येष्ठमग्निमानवम् । य स्म श्रुतर्वन्नार्क्षे बृहदनीक इध्यते ॥

अगन्म । वृत्रहन्तमम् । वृत्र । हन्तमम् । ज्येष्ठम् । अग्निम् । आनवम् । यः । स्म । श्रुतर्वन् । आर्क्षे । बृहदनीकः । बृहत् । अनीकः । इध्यते ॥८९॥

Samveda - Mantra Number : 89
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 9;

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1 Bhashyas
Meaning
हम (वृत्रहन्तमम्) पापों के अतिशय विनाशक, (ज्येष्ठम्) सर्वाधिक प्रशंसनीय और महान् (आनवम्) मनुष्यों के हितकारी (अग्निम्) तेजस्वी परमेश्वर को (अगन्म) प्राप्त हुए हैं। (यः स्म) जो (श्रुतर्वन्) प्रसिद्ध किरणरूप अश्वोंवाले ज्योतिर्मय सूर्य में तथा (आर्क्षे) तारापुंज में (बृहदनीकः) विशाल तेजवाला होकर (इध्यते) भासमान होता है ॥९॥
Essence
प्रचण्ड दीप्तिवाले सूर्य में, तारामण्डल में, सारे ही ब्रह्माण्ड में जिसका कर्तृत्व, जिसकी दी हुई शक्ति, जिसका उत्पन्न किया तेज द्योतमान है, जो पापों का संहारक, मनुष्यों का हितकर्ता, सर्वाधिक प्रशंसनीय पुराण-पुरुष है, उसकी सबको वन्दना, प्राप्ति और उपासना करनी चाहिए ॥९॥ इस मन्त्र पर कुछ लोगों की यह व्याख्या असंगत है कि श्रुतर्वा नाम का कोई राजा था, जो ऋक्ष का पुत्र था, जिसके पास अग्नि प्रदीप्त रहती थी, क्योंकि वेदों में लौकिक इतिहास नहीं है ॥९॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा के गुणों का वर्णन है।