Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 813

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- प्रगाथः(विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
त्वा꣢मि꣣दा꣡ ह्यो नरोऽपी꣢꣯प्यन्वज्रि꣣न्भू꣡र्ण꣢यः । स꣡ इ꣢न्द्र꣣ स्तो꣡म꣢वाहस इ꣣ह꣢ श्रु꣣ध्यु꣢प꣣ स्व꣡स꣢र꣣मा꣡ ग꣢हि ॥८१३॥

त्वा꣢म् । इ꣣दा꣢ । ह्यः । न꣡रः꣢꣯ । अ꣡पी꣢꣯प्यन् । व꣢ज्रिन् । भू꣡र्ण꣢꣯यः । सः । इ꣣न्द्र । स्तो꣡म꣢꣯वाहसः । स्तो꣡म꣢꣯ । वा꣣हसः । इह꣢ । श्रु꣣धि । उ꣡प꣢꣯ । स्व꣡स꣢꣯रम् । आ । ग꣣हि ॥८१३॥

Mantra without Swara
त्वामिदा ह्यो नरोऽपीप्यन्वज्रिन्भूर्णयः । स इन्द्र स्तोमवाहस इह श्रुध्युप स्वसरमा गहि ॥

त्वाम् । इदा । ह्यः । नरः । अपीप्यन् । वज्रिन् । भूर्णयः । सः । इन्द्र । स्तोमवाहसः । स्तोम । वाहसः । इह । श्रुधि । उप । स्वसरम् । आ । गहि ॥८१३॥

Samveda - Mantra Number : 813
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (वज्रिन्) दोषों का वर्णन करनेवाले विद्वन् ! (त्वाम् इत्) आपको ही (भूर्णयः) वैभवशाली (नरः) लोग (इदा) इस काल में और (ह्यः) अतीत काल में (अपीप्यन्) उपहार आदि प्रदान कर बढ़ाते हैं और बढ़ाते रहे हैं। (सः) वह, हे (इन्द्र) विद्या के ऐश्वर्य से युक्त विद्वन् ! (स्तोमवाहसः) आपके प्रति स्तोत्र या पदार्थसमूह पहुँचानेवाले हम लोगों को, अर्थात् हमारे निवेदन को (इह) यहाँ (श्रुधि) आप सुनिए और सुनकर हमारा आतिथ्य ग्रहण करने तथा हमें उपदेश देने के लिए (स्वसरम्) हमारे घर (उप आगहि) आइए ॥१॥
Essence
सब उन्नति चाहनेवाले लोगों को चाहिए कि विद्वानों का सत्कार करें और विद्वानों को भी चाहिए कि अध्ययन की हुई सब विद्याएँ उन्हें दें ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा की व्याख्या पूर्वार्चिक में ३०२ क्रमाङ्क पर परमेश्वर और राजा के पक्ष में की गयी थी। यहाँ विद्वान् का विषय वर्णित किया जा रहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.